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'पुलवामा का उपहार'
October 15, 2019 • डॉ. विद्यासागर मिश्र 'सागर'

तलवारें जो म्यान में थी हमने उनको जब धार दिया।

चालिस के बदले में हमने चार शतक को मार दिया ।।

 

छप्पन इंची, छप्पन इंची कल तक जो चिल्लाते थे।

चीन और अमरीका के आगे जो शीश झुकाते थे।

आज बोलती बंद हो गई, हमने जब घुसकर मारा।

करता है गुहार सबसे वह घूम रहा मारा मारा।

भारतीय सेना ने आतंकी कैंपो पर वार किया।

चालिस के बदले में हमने चार शतक को मार दिया।।

 

भारतीय वायुसेना ने अपना करतब दिखा दिया।

पाक के अंदर घुसकर उसने बड़ा सा बम गिरा दिया।

त्राहि-त्राहि मच गयी पाक में आतंकी बे मौत मरे।

आतंकी के घर में घुसकर हमने उनके प्राण हरे।

पानी गुजरा सर के ऊपर तब सीमा को पार किया।

चालीस के बदले में हमने चार शतक को मार दिया।।

 

भारत की सैन्य शक्ति को अब तो तुम जान गए होंगे।

भारत के सैनिक का साहस भी पहचान गये होंगे।

नहीं चूकता कभी निशाना है भारत के वीरों का।

विश्व मानता है अब लोहा भारत के रणधीरों का।

भारतीय वायु सेना ने जमकर खूब प्रहार किया।

चालीस के बदले में हमने चार शतक को मार दिया।।

 

आतताइयों के घर में हम घुसकर बम को फोड़ेंगे।

छेड़ेगा गर बैरी हमको कभी न उसको छोड़ेगें।

अब भी गर तुम ना सुधरे, चेहरे का खोल बदल देंगे।

बात नहीं इतिहास की है पूरा भूगोल बदल देंगे।

छप्पन इंची सीने ने पुलवामा का उपहार दिया।

चालिस के बदले में हमने चार शतक को मार दिया।।