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पंजाबी खानपान का बेजोड़ जायका
January 24, 2020 • प्रवीण भाटिया

गली कूचों से लेकर सड़को के किनारे लगे ढाबे व महानगरीय पंचसितारा होटलों तक में पंजाबी व्यंजनों की विशिष्ट पहचान है। प्रायः शाकाहारी व मांसाहारी दोनों तरह के व्यंजनों में पंजाब की पैठ है लेकिन जहाँ शुद्ध पर्यावरण व स्वास्थ्य प्रद जीवन शैली के महत्त्व को ध्यान रखते हुए हम यहाँ आज केवल शाकाहारी पंजाबी व्यंजनों के सन्दर्भ में ही बात करना पसन्द करेंगे। दिनचर्या में प्रातः उठने से लेकर देर रात्रि तक पंजाबी खानपान सुगन्ध एवं तडकों के साथ जिव्हा स्वाद को मनचाही तृप्ति देने में सक्षम है।

उत्तरी भारत में समृद्धशाली पंजाब प्रान्त जहाँ कृषि प्रधानता गेहूँ उत्पादन व अन्य कृषि उत्पादा म महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है वहीं खानपान व जायके में भी बेजोड़ है!

शायद भारतवर्ष में ग्रामीण लोगों से लेकर शहरी लोगों तथा विदेशों में भी पंजाबी जायके ने धूम मचा रखी है। समृद्ध जीवनशैली के साथ-साथ पंजाबियों की मस्ती व स्वाद तथा जायके में भी समृद्ध खानपान खाने के शौकीनों के मुँह में पानी भर देता है।

गली कूचों से लेकर सड़को के किनारे लगे ढाबे व महानगरीय पंचसितारा होटलों तक में पंजाबी व्यंजनों की विशिष्ट पहचान है। प्रायः शाकाहारी व मांसाहारी दोनों तरह के व्यंजनों में पंजाब की पैठ है लेकिन जहाँ शुद्ध पर्यावरण व स्वास्थ्यप्रद जीवन शैली के महत्त्व को ध्यान रखते हुए हम आज केवल शाकाहारी पंजाबी व्यंजनों के सन्दर्भ में ही बात कला पसन्द करेंगे।

दिनचर्या में प्रातः उठने से लेकर देर रात्रि तक पंजाबी खानपान सुगन्ध तडको देने में सक्षम के साथ जिव्हा स्वाद को भीनी-भीनी तृप्ति देने में सक्षम है।

पंजाबियों के दिन की शुरुआत ही नाश्ते में पंजाबी भरवा पराठों के साथ होती है। आलू गोभी, मूली, चने की दाल, से युक्त भरवाँ पराठे व प्याज इत्यादि से युक्त मिस्से पराठे पंजाबियों की जान है। सलीके से दही व घर के बने हुए अचारों के साथ अतिथियों की आवभगत में भी इनका महत्त्वपूर्ण योगदान है। पंजाबियों की एक विशिष्टता है कि वे शुद्ध मक्खन व देसी घी का अधिकाधिक उपयोग करते हुए मन्दमन्द आँच पर इन्हें पकाकर जब उपयोग करते है तो ये सुदूर लोगों के खानपान से अलग लोकप्रियता प्राप्त करता है।

नाश्ते में पंराठो के साथ गाढ़ी चक्का मलाईदार दही व भूना हुआ जीरा डालकर इसके स्वाद को कई गुणा बढ़ाते हैं। पंजाबी लस्सी की भी एक विशिष्ट पहचान है। बड़े-बड़े गिलासों व कुल्हड़ में मलाई की गाढ़ी परत के साथ पिस्ता आदि से भरपूर पंजाबी लस्सी गर्मियों में तरावट व ठण्डक देने के लिये पर्याप्त है।

भारी भरकम नाश्ते के उपरान्त भी दोपहर का भोजन पंजाबियों के तन्दूर से बने व्यंजन तन्दूरी रोटी नॉन, भरवाँ नान पनीर टिक्का, दाल मक्खनी, दाल तड़का, राजमा चावल, कढ़ी चावल, छोले चावल, छोले भटूरे नरगीसी कोफ्ता, एवं सबसे विशिष्ट ग्रामीण आँचल की महक लिये पालक बथूआ व सरसों को धीमी आँच पर पकाया सरसों का साग व मक्का की रोटी (मकई की रोटी) स्वाद के शौकीनों को बरबस आकर्षित करती रहती है दाल मक्खनी की बात करें तो मक्खन में उड़द की दाल को राजमा के साथ पकाया जाता है जो कुछ-कुछ गाढ़ापन लिये होती है जिसे तन्दूर की रोटी के साथ भरपूर स्वाद के लिए खाया जाता है। काबुली सफेद चनों को पकाने की कई विधियाँ है किन्तु काला व हल्का भूरापन लिये पिण्डी छोले पंजाबियों का मुख्य भोजन है जिसे तन्दूरी रोटी नॉन व महकते चावलों के साथ खाया जाता है। पंजाबी समुदाय खान पान में कभी समझौता नहीं करता देश या विदेश में रहने वाले पंजाबी अपनी आजीविका को पहनने ओढ़ने व स्वादिष्ट भोजन की सन्तुष्टि में ही अधिक खर्च करते है। अक्सर घरों, ढाबों व होटलों में तन्दूर का अधिक उपयोग किया जाता है। तन्दूरी रोटी, तन्दूरी नॉन तन्दूरी भरवाँ नान तन्दूरी पराठे तन्दूरी भरवाँ पराठे स्वाद के रसियाओं को आकर्षित करते रहते हैं। आम भारतीय जहाँ मक्खन व घी से परहेज कर दूरी बनाने का प्रयास करते है वहीं पंजाबियों के खानपान में मक्खन व शुद्ध देशी घी मुख्य घटक है। पंजाबी मानते है कि शरीर को सेहतमन्द रखने के लिये मक्खन व घी हड्डियों के जोड़ों में तरलता बनाये रखने के लिए बनाये हैं। मैदे से बने कुलचे व छोले भी पंजाबियों द्वारा बड़े चाव से खाये जाते है।

मिठाईयों में भी आटे घी, ड्राई फूट बनी पंजाबी पिन्नीयाँ भी विशेष पहचान लिये हुए है जिसे हम लड्ड के नाम से जानते है।

प्रकृति प्रदत्त पाँच नदियों के किनारे बसा पंजाब प्रान्त का पानी हल्का होने के कारण शीघ्र भोजन को पचा देने की क्षमता रखता है यही कारण है कि पंजाबी खानपान के शौकीन होने के साथ छोटे-छोटे अन्तराल पर कुछ न कुछ खाना पसन्द करते है।

मक्खन व घी युक्त भोजन के कारण पंजाबियों की शारीरिक गठन व आभायुक्त मुखमण्डल भी प्रसिद्ध है। बलिष्ठ भुजाओं व चौड़े कन्धे के पुरुष व गौरवर्ण आभायुक्त तन्दुरुस्त महिलायें खानपान, भाषाशैली व विशिष्ट पहनावे विश्व विख्यात हैं।

शान से जीना शान से खाना व भरपूर मस्ती के संग परम्पराओं व संस्कृति को सहेजना कोई पंजाबीयों से सीखे।