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दीपावली पूजन में स्थान एवं दिशा का रखें ध्यान
October 19, 2019 • अनिता जैन

धन-वैभव, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्राप्ति के लिए दीपावली की रात्रि को लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना गया है। घर, कार्यस्थल पर माँ लक्ष्मी की कृपा बनी रहे, पूजा-पाठ का पूर्ण लाभ मिल सके इसके लिए आवश्यक है कि श्रद्धा भक्ति के साथ हम सब दीपावली पूजन न केवल सच्चे मन से करें, बल्कि वास्तु नियमों को ध्यान में रखकर सही तरीके से भी पूजा-आराधना करें। इससे ध्यान भी केंद्रित होता है और पूजा का फल भी शीघ्र प्राप्त होता है। दीपावली पूजन की तैयारी करते समय दिशाओं, रंगों आदि का उचित समन्वय रखना बेहद जरूरी है। 

सही दिशा में हो पूजन

सर्वप्रथम तो पूजन कक्ष साफ-सुथरा हो. उसकी दीवारें हल्के पीले, गुलाबी, हरे जैसे आध्यात्मिक रंग की हों तो अच्छा है क्योंकि ये रंग सकारात्मक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते हैं। काले, नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए। वास्तु विज्ञान के अनुसार मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा की दिशा उत्तर-पूर्व (ईशान) पूजा करने के लिए आदर्श स्थान है क्योंकि यह कोण पूर्व एवं उत्तर दिशा के शुभ प्रभावों से युक्त होता है। घर के इसी क्षेत्र में सत्व ऊर्जा का प्रभाव शत-प्रतिशत होता है। पूजन करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा चूंकि धन का क्षेत्र है इसलिए यह क्षेत्र यक्ष साधना (कुबेर), लक्ष्मी पूजन और गणेश पूजन के लिए आदर्श स्थान है। ध्यान रहे दीपावली पूजन में मिटटी के लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां अथवा चित्र आदि छवियाँ नई हों। चांदी की मूर्तियों को साफ करके पुनः पूजा के काम में लिया जा सकता है। पूजा कलश व अन्य पूजन सामग्री जैसे खील- पताशा, सिन्दूर, गंगाजल, अक्षत-रोली, मोली, फल-मिठाई, पान-सुपारी, इलाइची आदि उत्तर-पूर्व में ही रखा जाना शुभ फलों में वृद्धि करेगा। देवी लक्ष्मी को लाल रंग अत्यधिक प्रिय है। लाल रंग को वास्तु में भी शक्ति और शौर्य का प्रतीक माना गया है अतः माता को अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, श्रृंगार की वस्तुएं एवं पुष्प यथा संभव लाल रंग के होने चाहिए। पूजा कक्ष के दरवाजे पर सिन्दूर या रोली से दोनों तरफ स्वास्तिक बना देने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करती हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार शंख ध्वनि व घंटानाद करने से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और आस-पास का वातावरण शुद्ध और पवित्र होकर मन-मस्तिष्क में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। दीपावली पूजन में श्रीयंत्र, कौड़ी एवं गोमती चक्र की पूजा सुख-समृद्धि को निमंत्रित करती है।

जान का पतीक दीपक

दीपावली की पूजा में घी या तेल के दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, घर के सदस्यों को प्रसिद्धि मिलती है। वास्तु नियमों के अनुसार अखंड दीपक पूजा स्थल के आग्नेय कोण में रखा जाना चाहिए, इस दिशा में दीपक रखने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि का निवास होता है। दीपावली के दिन लक्ष्मी जी की पूजा के दीपक उत्तर दिशा में भी रखे जा सकते हैं। ध्यान रखें कि यदि मिटटी का दीप जला रहें हैं तो दीप साफ हो और कहीं से टूटे हुये न हो। किसी भी पूजा में टूटा हुआ दीपक अशुभ और वर्जित माना गया है।

लाभ की हो रंगोली

यदि आपका घर पूर्वमुखी है और आप मुख्य द्वार पर रंगोली बना रहें हैं तो घर में सौहार्दपूर्ण वातावरण के विकास एवं मान-सम्मान में वृद्धि के लिए लाल, पीला, हरा, गुलाबी, नारंगी रंगों के इस्तेमाल से अंडाकार डिजाइन की रंगोली बनाएं। उत्तर मुखी घर के लिए उत्तर दिशा में लहरदार या जल के गुण से मिलताजुलता डिजाइन पीले, हरे, आसमानी और नीले रंगों के प्रयोग से बना कर उन्नति के नए अवसरों को आमंत्रित करें। गहरा लाल, नारंगी और गुलाबी रंगों के चयन से दक्षिण दिशा में आयताकार रंगोली बनाकर अपने यश और आत्मविश्वास में वृद्धि कर सकते हैं। इसी प्रकार पश्चिम दिशा में सफेद और सुनहरे रंगों के साथ लाल, पीला, हरा एवं भूरे रंगों का प्रयोग करके गोलाकार या पंचकोण आकृति में रंगोली बनाएं। ऐसा करके आप अपने जीवन में लाभ एवं प्राप्तियों को आमंत्रित कर सकते हैं।