21 जून 2019 :अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रस्तुत एक हठ योगी से पावर योग के बारे में बातचीत के कुछ अंश
June 21, 2019 • वानी वाजपेयी  एवं प्रज्ञा अग्रवाल 

1958 में मध्य प्रदेश के एक क्षत्रिय परिवार में जन्में योगी जीतानन्द जी आज अपने 62 वर्ष पूरे करे चुके हैं। मार्शल आर्ट, कुंग फू, कराटे एवं 'पावर योगा' में पारंगत यह योगी अभी तक अनजान है। 45 वर्ष की आयु से योग का अभ्यास प्रारम्भ कर यह हठ योगी अनेक प्रकार के योग दिखाकर लोगों को अचंभित कर रहे हैं। 'दी कोर' मासिक पत्रिका के कार्यालय में आए इस योगी ने अपने बारे में जो बताया वह उनकी ही भाषा में हम यहां प्रस्तुत कर रहे हैं, जिसे अभी तक कोई लाग-लपेट नहीं आता। जो उन्हें अपने बारे में पता है वह उसको उन्हीं शब्दों में प्रस्तुत कर रहे हैं। वानी वाजपेयी एवं प्रज्ञा अग्रवाल द्वारा उनके साथ बातचीत के अंश 21 जून 2019 को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर प्रस्तुत करके हमें गर्व महसूस हो रहा है :-

 

आप हमें अपने जीवन के बारे में क्या बताएँ?

हमारा जन्म 9.1.1958 को मध्य प्रदेश, ग्राम कोहड़ा, एक क्षत्रिय परिवार में हुआ थाहमने अपनी शिक्षा गाँव से ही ग्रहण की थी। जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिवार की जिम्मेदारियाँ बढ़ने लगी, इसी कारण हमें शिक्षा बीच में ही छोड़नी पड़ी। इसके अतिरिक्त हमारा ध्यान खेल की तरफ बचपन से ही था। मार्शल आर्ट, कुंग फू, कराटे में ज्यादा रूचि रही। हमेशा से ही हमें खेलों के प्रति लगाव था और हमने इसी की तरफ अपना कदम बढ़ाना शुरू किया।

 

आपने योग को कैसे अपना लक्ष्य बनाया?

सन् 1977 से 45 वर्ष की आयु में हमने इसकी शुरूआत कीइंदौर में हमने कराटे सिखना आरम्भ कियाबाद में मुम्बई से हमने शितो-रयु कराटे का अभ्यास किया उसके पश्चात् दिल्ली में हमने टी.के. राजन, एक साउथ इंडीयन के पद्धति शोरिनरयु कराटे में इन्टरनेशनल फेडरेशन से जुड़कर अभ्यास किया। इसके बाद हमने ग्वालियर में अभ्यास किया और अनेक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। 1984 में अपने जिले में कराटे प्रशिक्षण केन्द्र प्रारम्भ किया। इससे बहुत से लोगों को लाभ हुआ। 1995 में दिल्ली में एक कारखाना शुरू किया, जो एक साल बाद बन्द हो गया। इसके बाद दिल्ली में हमने 1997 में एक इन्टरनेशनल फेडरेशन से ब्लैक बेल्ट में दो पदक हासिल किए। एक प्रकार से हम सारे कार्यों में बहुमुखी रहे हैं। जैसे कि व्यापार, खेल-कूद, कलाकारी, चित्रकारी आदि। कुछ किताबे भी लिखी हैं।

 

जैसे कि आपने बताया आपने किताबे भी लिखी हैं, क्या आप हमें अपनी किताबों के बारे में कुछ बता सकते हैं।

सन् 2002 से हमने माध्यमिक योग में खोज करनी प्रारम्भ की। योग विषय पर हमने कम से कम 20 किताबें लिखी हैंमोटी किताब कम से कम 300 पन्नों की है। आन्तशोध त्रिवोद हमने लिखी थी जो कि 3 किताबों को जोड़कर हमने बनाई थी। इसका विकास करके हमने एक किताब लिखी जो आन्तशोध सर्वोदिनिय के नाम से जानी जाती है। इसमें एडवांस योगा के बारे में बताया हुआ है। इसके 10 भाग हैं। उसके अतिरिक्त हम एक किताब आत्मरक्षा सिद्धियोग साधना पर लिख रहे हैंजिसमें योगा, मार्शल आर्ट, कुन्फू, कराटे का प्रशिक्षण दे रहे हैं। यह किताब दुनिया की सबसे बहतरीन किताबों में से एक मानी जाएगी जो कि 400 पन्नों तक की होगी।

 

क्या आप हमें 'पावर योग' के इतिहास के बारे में बता सकते हैं?

जब हमें पावर योग में रूचि थी और योगा में रूचि हुई तो हमने देखा कि दोनों का अभ्यास भारतीय योग विद्या पर आधारित हैं और हमें अनुभव हुआ कि यह विद्या भारतवर्ष ऋषि मुनियों के समय से है। उस समय यह विद्या उन लोगों को सिखाई जाती थी जो वन में तप करते थे। जिससे कि वह लोग अपनी रक्षा कर पाएँ। इसको जुजीत्सु नाम से जाना जाता था। फिर इसी को कराटे के नाम से अलग-अलग संस्थाओं में सिखाया जाने लगा।

आपके अनुसार योग का क्या अर्थ है?

योग का वास्तव अर्थ ही जोर/ मेल है। आत्मा और परमात्मा के मेल को ही योग कहते हैं।

 

संयोगो योग इति युक्तो, जीव आत्म परमात्मानोर्थ

जीव आत्मा परमात्मा का मेल ही योग है। अर्थात् संसार में आशक्त हुआ मन जिसके द्वारा परमात्मा से जोड़ा जाए, उसी का नाम योग है। आजकल लोग संसार में विभिन्न वस्तुओं में आशक्त हुए हैं। लोगों के लिए यह समझना अनिवार्य है कि शरीर सबसे महत्वपूर्ण है। जन्म से मृत्यु तक यदि शरीर साथ न रहे तो क्या फयदा।

 

क्या साधना के बारे में हमें संक्षिप्त में बताना चाहेंगे।

हमने योग में पांच तरीके से साधना की खोज की है

1. सर्वमनोद्यत अभिष्ठ-सिद्धियोग साधना : इसका अर्थ है सबके मन का इसमें वृद्ध, बच्चे, मोटे, पतले आदि हर प्रकार के लोग इस साधना को कर सकते हैं और यह सबसे सरल है।

2. जीवन सार्थक सिद्धियोग साधना : यह साधना बच्चों और नौजवानों को प्रेरित करने के लिए है। इसमें ज्यादा लाभ का अनुभव होता है। जब बालक इसमें प्रवेश करते हैं तो उनका जीवन सार्थक हो जाता है।

3. शौष्ठव साधना : यह पावर योग कहलाता है। इससे शरीर मजबूत होता है और यह सहनशक्ति, सहनशीलता, शक्ति और स्थिरता को बढ़ाता है। यह विशेषतः खिलाड़ियों के लिए है।

4. आत्मरक्षा सिद्धियोग साधना : यह साधना अपनी रक्षा करना सिखलाती है।

5. विशिष्ठ योगा : यह सिद्ध योगियों के लिए है। यह अंतरिक्ष योगा के नाम से जाना जाता है।

 

 

योग में छः क्रियाओं में से नौली क्रिया के बारे में आप क्या बताना चाहेंगे?

योग में छः क्रियाएँ होती हैं :- कपाल भाती, नेती, तृतक, नौली, धौति, वस्ती आदि सबसे उत्तम क्रिया होती है नौली क्रिया। इसमें पेट को लगातार दो बार दाएँ-बाएँ घुमाना होता है। यह सारे रोगों का नाश करती है। इससे नलों की सफाई हो जाती है। आमतौर पर इसमें दो आसनों का प्रयोग होता है, लेकिन हमने इसमें 250 आसनों का प्रयोग किया है।

 

 

नौली शब्द कैसे उत्पन्न हुआ?

आहार शब्द से नल बना और नल शब्द से नौली बना।

 

आपकी दिनचर्या और आहार के बारे में कुछ बताएँ।

हम सुबह 3-4 बजे तक उठ जाते हैं। फिर उठकर व्यायाम करते हैं। व्यायाम के बाद मालिश फिर स्नान करते हैं और फिर योग और योग के बाद हम सुबह 7-8 बजे मूंगफली के बीज और बादाम का प्रयोग करते हैं। कभी-कभी बादाम का सीरा भी लेते हैं। फिर हम विश्राम करते हैं। 12.00 बजे हम भोजन करते हैं। जिसमें रोटी, चावल, दाल और सालाद ग्रहण करते हैं। दिन में हम कम से कम छः लीटर पानी पीते हैं। भोजन करने के पश्चात् हम 5 बजे तक विश्राम करते हैं। 7-8 बजे तक हम हल्का भोजन कर लेते हैं जैसे कि खिचड़ी, दलिया, दूध आदि।

 

जैसे कि आप कम उम्र से ही खेल, मार्शल आर्ट, कराटे में रूचि रखते थे, हम जानना चाहेंगे कि इसके स्वास्थ्य लाभ क्या हैं?

योग के वैसे तो बहुत लाभ है। इसमें शारीरिक और मानसिक उपचार सबसे अधिक ज्ञात लाभों में से एक है। योग सहनशीलता और ऊर्जा को भी बढ़ाती है। यह मानसिक, भौतिक आत्मिक और अध्यात्मिक सेहत में सुधार लाता है।

 

 

आप कितने वर्षों से योग का अभ्यास कर रहे हैं?

हमने कम उम्र से ही खेल-कूदों में रूचि रखी है और हमने 19 साल की उम्र से मार्शल आर्ट, कराटे में प्रशिक्षण लेना शुरू कर दिया था और योग हमने 45 वर्ष की उम्र से प्रारम्भ किया।

 

 

आजकल के युवा मोबाइल और सामाजिक मीडिया में बहुत ही लिप्त हैं, इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

सामाजिक मीडिया ही आजकल लोगों को अपनों से दूर कर रहा है तथा अपने शरीर से भी। आजकल युवा इतने मगन हैंकि कुछ और उनको दिखता ही नहीं। आधे से ज्यादा समय वे मोबाइल का प्रयोग करने में ही निकाल देते हैंलेकिन अब समय इतना आगे बढ़ चुका है कि अब इसको कम करना बहुत ही मुश्किल है।