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2018 तक देश के शत-प्रतिशत गाँवों तक पहुँचेगी बिजली: पीयूष गोयल
July 1, 2017 • Parmod Kumar Kaushik

सरकार को बने तीन साल हो गये हैं। इस दौरान ऊर्जा-क्षेत्र में क्या प्रगति है?

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार एक ऐसे बृहत्तर मिशन पर काम कर रही है जिसके तहत देश के प्रत्येक घर को चौबीस घंटे स्वच्छ और सस्ती बिजली उपलब्ध हो सके। इस मिशन में जो तीन शब्द चौबीस घंटे', 'स्वच्छ और 'सस्ती' शब्द आए हैं, वे अपने आपमें एक लक्ष्य हैं। वर्ष 2014 के बाद देश के ऊर्जा-क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन आया है। इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब देश में ऊर्जा और कोयले का उत्पादन हमारी ज़रूरत से अधिक है। इस उपलब्धि के पीछे ऊर्जा-क्षेत्र में किए गए बृहत्तर सुधार हैं जिनमें कोयले के उत्खनन से लेकर उपभोक्ताओं तक बिजली पहुँचाने की पूरी प्रक्रिया शामिल है।

मई 2014 और जून 2017 के बीच देश के ऊर्जा-उत्पादन में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है और आज यह 330 गीगावॉट है। ऊर्जा सप्लाई नेटवर्क की यदि बात करें, तो आज ‘एक देश, एक ग्रिड और एक मूल्य' की सोच हकीकत बन चुकी है। उदय योजना यानि उज्ज्वल डिस्कॉम एश्यारेंस योजना के तहत पूरा विद्युत वितरण क्षेत्र व्यापक बदलाव के दौर में है। एग्रीगेट टैक्निकल एवं कॉमर्शियल हानि 27 में से उन 23 राज्यों में कम हो गई है जो इस योजना में शामिल हो गये हैं। इस कारण पूरे देश में विद्युत-आपूर्ति में जबर्दस्त सुधार हुआ है। विद्युत वितरण हानि और भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण के कारण अब उपभोक्ताओं के बिजली-बिलों में भी ठहराव हुआ है।

इसके अलावा अक्षय ऊर्जा को लेकर भी हम दुनिया के सबसे बड़े कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं जिसके तहत वर्ष 2022 तक 175 गीगावॉट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य है। जिस गति से इस दिशा में काम चल रहा है, उसे देखकर लगता है कि इस लक्ष्य को हम बहुत जल्दी प्राप्त कर लेंगे। वर्ष 2016-17 के दौरान देश में परम्परागत ऊर्जा की अपेक्षा अक्षय ऊर्जा की क्षमता अधिक बढ़ी है।

इन तीन सालों में हम हर गरीब की कुटिया और पढ़ाई करनेवाले विद्यार्थियों तक बिजली पहुँचाने में सफल रहे हैं। जो गाँव पिछले सात दशक से अंधेरे में थे, वहाँ आज बिजली पहुँच चुकी है। देश के सर्वाधिक दूरदराज के गाँव में भी वर्ष 2018 तक बिजली पहुँच जाएगी। इसी प्रकार विद्यार्थियों को बिजली उपलब्ध कराकर हम एक प्रकार से देश के भविष्य को रोशन करने का प्रयत्न कर रहे हैं। पहले ऐसा नहीं था। अब वे जब चाहें पढ़ाई कर सकते हैं। इससे वे विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं की तैयारी कर बहुत-से नये अवसरों का लाभ उठा सकेंगे।

हमारे प्रत्येक प्रयास के केन्द्र में है उपभोक्ताओं का हित और पारदर्शिता। गर्व और विद्युत प्रवाह-जैसे मोबाइल एप के कारण सहभागितापूर्ण शासन को बढ़ावा मिला है। आज लोग आगे बढ़कर सरकार से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। मेरिट एप के कारण वितरण-कंपनियों द्वारा विद्युत खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता आई है। इससे न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा बल्कि विद्युत की कीमतों में भी कमी की जा सकेगी।

जिस प्रकार देश में सीमा-सुरक्षा और खाद्यान्न-सुरक्षा आवश्यक है, उसी प्रकार ऊर्जा-सुरक्षा भी जरूरी है। क्या हम कह सकते हैं कि आज देश ऊर्जा-सुरक्षा की दृष्टि से सही मायने में स्वावलंबी है?

किसी भी समृद्ध और सुरक्षित देश के लिए ऊर्जा-सुरक्षा एक अति महत्त्वपूर्ण बिन्दु है। देश की ऊर्जा-सुरक्षा के लिए हम एक दोहरी सोच पर काम रहे हैं। एक, कोयले के आयात को कम करके देश में ही कोयले का अधिक-से-अधिक उत्पादन एवं दूसरा है थर्मल पावर को कम करके अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा। कोयले की यदि बात करें, तो हमारे देश में कोयले की बहुत अधिक कमी थी लेकिन आज हमारे पास हमारी जरूरत से भी अधिक कोयला उपलब्ध है। जब हमने सत्ता संभाली थी, उस समय देश के दो-तिहाई पावर प्लांट कोयले की भारी कमी से जूझ रहे थे। लेकिन आज कहीं भी कोयले की कमी नहीं है। वर्ष 2014 में देश के कोयला ऊर्जा उत्पादन संयंत्र करीब 83,100 मेगावॉट बिजली का उत्पादन कर रहे थे जो अधिकतर आयातित कोयले पर निर्भर थे। लेकिन हम आज सरप्लस कोयले के दूसरे उपयोग पर भी विचार कर रहे हैं। कोयले के आयात में कमी से पिछले तीन साल में करीब 25,900 करोड़ रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। वर्ष 2014 में कोयले का जो आयात 218 मिलियन टन था, वह 2016-17 में घटकर 191 मिलियन टन रह गया है। अक्षय ऊर्जा को लेकर हम अत्यधिक गंभीर हैं। परम्परागत ऊर्जा की तुलना में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2016-17 में पहली बार पारंपरिक ऊर्जा से अधिक अक्षय ऊर्जा की उत्पादन-क्षमता बढ़ी है। इस दौरान सोलर और विंड ऊर्जा की उत्पादन-क्षमता में 11 गीगावॉट की बढ़ोत्तरी हुई है। पहले अक्षय ऊर्जा की अधिक कीमत के कारण इसके विकास में बाधा बन रही थी। 

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