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"शाजापुर इतिहास" पुस्तक का विमोचन समारोह
January 23, 2020 • Parmod Kumar Kaushik

लोक भाषा परिषद् शुजालपुर द्वारा शाजापुर के एक निजी होटल में इतिहासकार ललित शर्मा द्वारा लिखित एवं लोक संस्कृतिविद् डॉ. वर्षा नालमे द्वारा सम्पादित पुस्तक "शाजापुर जिलाः इतिहास और पर्यटन" का विमोचन समारोह सम्पन्न हुआ।

समारोह के मुख्य अतिथि ख्यात नाम कला इतिहासकार नर्मदा प्रसाद उपाध्याय (इन्दौर) ने कहा कि शाजापुर की गौरव गरिमा से युक्त यह पुस्तक मालवा और हाडौती के अन्तर सम्बन्धों को स्थापित करने के साथ ही अनेक अन्धकारमय ऐतिहासिक पक्षों को उद्घाटित करेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में स्थानीय इतिहास और कला के वैशिष्टय को महत्वपूर्ण माना गया है जिसके अन्तर्गत मालवा में यह पुस्तक एक मानक ग्रन्थ है। इस अवसर पर उन्होंने कश्मीर क्षेत्र के इतिहास पर लिखे प्राचीन ग्रन्थ 'कल्हण' की 'राजतरंगिणी' की चर्चा की। उन्होंने कहा कि मालवा में यह पहली पुस्तक है जो शाजापुर जिले के पुरातत्व, इतिहास एवं संस्कृति के समग्र उपादानों पर केन्द्रित है।

समारोह की अध्यक्ष शिक्षा मनोवैज्ञानिक डॉ. प्रेम छाबड़ा (उज्जैन) ने कहा कि उन्हें खासकर इस बात की हार्दिक प्रसन्नता है कि उनके दोनों शिष्यों ने मालवा के इस अछूते जिले तथा इसके पर्यटन स्थलों के वैशिष्टय को प्रमाणों के साथ उजागर किया। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक मालवा के इतिहास के साथ-साथ विद्यालयी शिक्षा स्तर पर भी बहुत महत्वपूर्ण है तथा इसे विश्वविद्यालय शोध का आधार बनाया जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि प्राच्य पुरातत्वविद् डॉ. कैलाश चन्द पाण्डेय (मन्दसौर) ने कहा कि इस पुस्तक का सर्वाधिक वैशिष्टय यह भी है कि इसमें विवेच्य जिले को मध्यकाल से पूर्व परमार काल से स्थापित किया गया है। इस आधार पर यह माना जाना चाहिए कि लेखक ने इसमें अपने गुरूवर्य पुरातत्ववेत्ता डॉ. वाकणकर की कला साधना को आगे बढ़ाने का सफल प्रयास किया है। उन्होंने कहा कि यहां की अचर्चित मूर्तिकला, मुद्राएं तथा शिला लेखीय परम्परा का पहली बार पुरातत्त्व सम्मत विवरण एक मात्र इस पुस्तक में किया गया है जो बेहद प्रभावी है।

विशिष्ट अतिथि शाजापुर के जिला शिक्षा अधिकारी उदय उपेन्द्र भिंडे ने कहा कि यह पुस्तक इस जिले के विद्यालयों के विद्यार्थियों विद्यालयों के विद्यार्थियों हेतु अत्याधिक उपयोगी है जिससे वे अपना स्थानीय इतिहास और संस्कृति जान सकेगें

समारोह में लेखक ललित शर्मा ने पुस्तक के अध्यायों की सविस्तृत भूमिका प्रस्तुत की तथा उन्होंने इस क्षेत्र में खोजे गये नवीन पुरास्थलों की जानकारी दी। समारोह में लोकसंस्कृतिविद् डॉ. जगदीश भावसार, साहित्यकार दुर्गा प्रसाद झाला, प्रो. एम.आर. नालमे, दिलीप सिंह झाला, विशाल सिंह झाला एवं श्रीमती सौदामिनी सिंह झाला का श्रीनाथ द्वारा का ओपरना, शाल, पुष्पाहार, पहनाकर एवं श्रीफल तथा प्रतीक चिन्ह भेंटकर सम्मान किया गया। अतिथियों का स्वागत परिषद् के संस्थापक बंशीधर बन्धु, जुबीन नालमे, श्रीमती गोपी मिहानी, राम प्रसाद सहज, तृप्ति नालमे, सुरेश अरोड़ा ने किया। समारोह का संचालन डॉ. वर्षा नालमें ने एवं आभार श्रीमती गायत्री शर्मा ने प्रदत्त किया। समारोह में शहर के बुद्धिजीवी एवं पत्रकार भी बड़ी संख्या में मौजूद थे।

इस अवसर पर 'दी कोर' पत्रिका के विभिन्न अंक वैशिष्टय को प्रस्तुतकर प्रधान संपादक प्रमोद कौशिक के प्रकाशन प्रबन्धन की जानकारी दी गई एवं उपस्थित बुद्धिजीवियों को अंकों की प्रतियाँ वितरित की गई।