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"क्या वाकणकर होना है?"
March 20, 2020 • संदीप राशिनकर

वर्षों तक

खतरों/उपेक्षाओं से बेखबर

ध्येयनिष्ठ हो

शैलाश्रयों को खोजते

शैलचित्रों की प्रतिकृतियाँ आकारते

सापेक्ष कालगणना से

पुरातात्विक महत्ता स्थापित कर

विश्व में परचम फहराते

भीम बैठका हो जाना

क्या वाकणकर होना है?

शैलचित्रों का अन्वेषण करना

उन्हें खोजना

सदियों के अंधेरों से निकाल

उन्हें प्रकाश में लाना

क्या वाकणकर होना है?

टे खपरेलों, टुकड़ों

दबे जिवाश्मों पर जमी

मिट्टी खरोचना, खोदना

मानव जाती कि प्रगति जानना

काल को पढ़ना

संस्कृति के विस्मृत इतिहास को

सगर्व विश्व के सम्मुख लाना

क्या वाकणकर होना है?

टे खपरेलों, टुकड़ों

दबे जिवाश्मों पर जमी

मिट्टी खरोचना, खोदना

मानव जाती कि प्रगति जानना

काल को पढ़ना

संस्कृति के विस्मृत इतिहास को

सगर्व विश्व के सम्मुख लाना

क्या वाकणकर होना है?

कलाएं जोड़ती हैं

इस मन्त्र के साथ

कलाओं के बहाने

विश्व बंधुत्व के गीत गाना

चलायमान कर कोणार्क चक्र को

संस्कार भारती कि अलख जगाना

क्या वाकणकर होना है?

राष्ट्रपति भवन हो

उच्च अधिकारी या नेता हो

या हो बीहड़ में

संस्कृति कि रखवाली करता

वन/पुरा संपदा को सहेजता

आदिवासी, मजदूर या किसान हो

आलथी पालथी मार

संग सबके सहजता से बतियाना

क्या वाकणकर होना है?

जानना, जताना, जागृत बनाना

अपने बारे में

पुरा महत्ता/राष्ट्रीय महत्ता के बारे में

बोलचाल कि भाषा बोलियों

में बतियाना या

अंतरराष्ट्रीय सेमिनारों में

विदेशी विद्वानों की

गलत धारणाओं/षड्यंत्रों की बखिया उधाडना

क्या वाकणकर होना है?

अपने हजारों हजार चित्रों में

समेटना, संजोना

पुरा वैभव, शैलचित्र या

शिला लेखों में छिपे पुरातन संवाद

देश-विदेश के दृश्य चित्रों/व्यक्ति चित्रों/अनुभवों को

या विशाल चित्रों से सिंहस्थ या संस्कार भारती समागमों

को संवारना या सजाकर

अपनी चित्रकला का लोहा मनवाना

क्या वाकणकर होना है?

लुप्त प्राय पुरा महत्त्व की

सरस्वती नदी को खोजना

उसके यात्रा मार्ग को लेखना

श्रमसाध्य परिश्रम व खोजी दृष्टि से

महती सामग्री जुटाना

क्या वाकणकर होना है?

एक कला दृष्टा, एक तपस्वी

एक मनस्वी, एक पुरातत्वेत्ता

एक चित्रकार, एक संस्कार गुरु

एक कला प्रदर्शनी संयोजक या

किसी भी वैश्विक धरातल/मंच या चौपाल पर

संत सा निगर्वी हो

संस्कृति प्रबोधक होना

क्या वाकणकर होना है?

बहुत असंभव, बहुत अशक्य है

यह जानना कि

क्या-क्या होना, कितना कितना होना

वाकणकर होना है

या सब जगह, सब कुछ होकर भी निगर्वी हो, मैं कुछ भी नहीं, यह जताना

वाकणकर होना है !!!