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‘पटा मेधा' (MID BRAIN) का जलवा बिखेरते गुरुकुलम् के छात्र
August 1, 2016 • Manoj Jwala

भारत-विरोधी विनाशकारी मैकाले-अंग्रेजी शिक्षण-पद्धति * की दासता से देश को उबारने के लिए सर्वमंगलकारी प्राचीन भारतीय शिक्षण-पद्धति से नयी पीढ़ी के निर्माण की टकसाल बनी हेमचन्द्राचार्य संस्कृत पाठशाला (गुरुकुलम्) में बच्चों को बल- वीर्य-बुद्धि-प्रज्ञासम्पन्न बनाने के निमित्त नित नये-नये प्रयोग होते रहते हैं। प्रयोगों की इसी श्रृंखला में यहाँ ‘परा मेधा' जागरण-शिविर आयोजन होते रहत हैं।

‘परा-मेधा' का मतलब है- असामान्य मेधा या दृश्यातीत मेधा, अर्थात् बन्द आँखों से वस्तुओं के आकार-प्रकार व रंग-रूप का ज्ञान प्राप्त कर लेने की बौद्धिक- मानसिक क्षमता। अंग्रेजी में इसे 'मिड ब्रेन' कहते हैं। मालूम हो कि मनुष्य की बुद्धिमत्ता के 9 स्तरों में से एक यह है कि किसी वस्तु अथवा पदार्थ को आँखों से देख लेने पर उसका ‘दृश्य रूप' मस्तिष्क में अंकित-संचित हो जाता है। यह तो सामान्य मेधा की बात है। किन्तु वस्तुओं को देखे बिना, या यों कहिए कि दर्शनेन्द्रिय अर्थात् आँखों का उपयोग किए बिना सिर्फ स्पर्श और गंध से वस्तुओं के बारे में ज्ञान प्राप्त कर लेना ‘परा मेधा' है। यह भारतवर्ष की प्राचीन विद्या है। इस मेधा के जागरण से मनुष्य की चेतना का बहुआयामी विकास और विस्तार होता है।

गुरुकुलम् के बच्चों को ‘परा मेधा' का यह प्रशिक्षण वस्तुतः ‘मैं कौन हूँ?' नामक पाठ्यक्रम के तहत दिया जाता है। सर्वप्रथम 09 से 16 फरवरी, 2016 तक आयोजित इस प्रशिक्षण शिविर में 9 वर्ष से 16 वर्ष की उम्र के 25 छात्रों को इस असामान्य मेधा का प्रशिक्षण दिया गया। वैसे तो अनेक छात्रों ने इस प्रशिक्षण में वरीयता हासिल की, लेकिन नंदीश संदीप भाई शाह और ऋषि विशाल भाई शाह को उत्कृष्ट वरीयता के लिए पुरस्कृत किया गया।

प्रशिक्षणोपरान्त स्वाभाविक ही इन बच्चों की आंतरिक चेतनाएँ विविध प्रकार से जागृत और विकसित पाई गयीं। अध्ययन-मनन विषयक इनके ध्यानअवधान के स्तर में भी गुणात्मक विकास रेखांकित किया गया। इसके साथ ही इनकी ‘परा मेधा का जागरण इस स्तर तक पहुँच गया कि अब ये छात्र अपने सामने खड़े किसी व्यक्ति के मन में चल रहे विचारों का अनुमान लगा लेते हैं; महज उस व्यक्ति से कोई एक अंक पूछकर। इतना ही नहीं, इन छात्रों की चेतना अब इस कदर जागृत होगई है कि ये ‘दूर-संवेदन विद्या' (टेलीपैथी) के द्वारा किसी अज्ञात व्यक्ति के वस्त्रों के रंग के आधार पर उस व्यक्ति के विचारों तथा उसकी योजनाओं के विषय में निश्चित अनुमान लगा लेने की सक्षमता भी हासिल करते जा रहे हैं।

। उल्लेखनीय है कि गत फरवरी 2016 में मुम्बई महानगर में पोरवाड समाज के द्वारा ‘परा मेधा' से युक्त प्रतिभावान् बच्चों की खोज के लिए आयोजित कार्यक्रम- ‘अभिनव जैन आइडल-2016' में हेमचन्द्राचार्य संस्कृत पाठशाला (गुरुकुलम्) के परा-मेधावी छात्र ऋषि कुमार ने अपनी इस विशिष्ट प्रतिभा का जलवा बिखेरकर 1,500 से भी अधिक दर्शकों को आश्चर्यचकित कर दिया। मालूम हो कि उस कार्यक्रम में प्रदर्शन के लिए सर्वप्रथम 150 प्रतिभागियों का चयन किया गया था, जिन्हें प्राथमिक परीक्षण की विभिन्न कसौटियों से गुजारने के बाद उनमें से मात्र 18 किशोरों को अन्तिम रूप से चुना गया।

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