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सॉरी दोस्त
June 20, 2019 • पवन चौहान

स्कूल से घर आते ही नमन के CUD हाथों में एक चिड़िया का बच्चा १ था। वह इसे अपने हाथ में लेकर बहुत खुश था। उसकी बहन नैंसी भी उसके साथ थी। वह भी खुश थी। खुश क्यों न होती! पहली बार ही तो उन्होंने किसी पक्षी को अपने हाथों से छुआ था।

इस चिड़िया के बच्चे को आज सुबह ही उसने स्कूल जाने से पहले घर के एक कोने में बने घोंसले से गिरते हुए देखा थाशायद यह उसकी पहली उड़ान का अभ्यास थानमन उसे पकड़ने के लिए जैसे ही लपका, चिड़िया का बच्चा हल्की- सी उड़ान के साथ आंगन में खड़ी गाड़ी के ऊपर बैठ गया। वह अभी छोटा था इसलिए वह ज्यादा नहीं उड़ पा रहा था। नमन जैसे ही उसे वहाँ पकड़ने लगा तो उसने एक बार फिर उड़ान भरी और घर के साथ बनी नाली के गंदे पानी के साथ एक छोटे से छेद के अंदर डर के मारे घुस गया। नमन ने फटाफट दादा को बुलाकर उसे बड़ी मुश्किल के साथ उस छोटे से छेद से बाहर निकलवाया। निकालने के उपरांत दादा जी ने उसे नमन को ही पकड़ा दिया। इसे छूते ही नमन एक नई ऊर्जा से भर गया था। उसने कल्पना भी नहीं की थी कि जिन पक्षियों को वह अपनी किताबों में बने चित्रों और रोज दूर उड़ते हुए देखता हैउन्हे वह कभी ऐसे अपने हाथ में भी पकड़ सकेगा। उसके लिए यह बहुत अनोखी बात थी। नैंसी के लिए भी ये अनमोल पल थे।

स्कूल जाने का समय हो रहा था। इसलिए नमन और नैंसी उसे घर के एक खाली कमरे में ले गए और वहाँ रखे स्कूटर के हैलीमेट के अंदर एक नरम-सा कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर रख दिया। उसे खाने के लिए पके हुए चावल और कुछ दानों के साथ एक छोटी-सी कटोरी में पीने के लिए पानी रख दिया।

दादा उसे वापिस घोंसले में छोड़ने की बात कर रहे थे। लेकिन नमन और नैंसी जरा भी नहीं माने। वे उल्टे नाराज होते हुए दादा से स्कूल जाते वक्त कहते गए कि दादा, यदि आपने इसे छोड़ा तो हम आपसे बात नहीं करेंगें। 

स्कूल जाते हुए चेहरे पर तसल्ली से चिड़िया के बच्चे के साथ न खेल पाने की उदासी उनके चेहरे पर साफ झलक रही थी।

दादा चुपचाप बार-बार कमरे के पास मंडराती चिड़िया को देखते ही रह गएउन्हें इस समय बच्चों की बात को मानना सही लग रहा था।

स्कूल घर के पास ही था। छुट्टी जब हुई तो नमन अपने सहपाठियों को पीछे छोड़ता हुआ सबसे पहले घर पहुँच चुका था। घर आकर उसे चिड़िया के बच्चे के होने की तसल्ली जो करनी थी। चिड़िया के बच्चे को अपने स्थान में पाकर नमन राहत की सांस ले रहा था। अब तक नैंसी भी पहुँच चुकी थी।

आज दोनों ने खाना भी नहीं खाया और कपड़े बदलने के उपरांत सीधे ही चिड़िया के बच्चे के पास पहुँच गए। अंदर पहुँचते ही उन्होंने कमरे का दरवाजा बंद कर दिया ताकि चिड़िया का बच्चा कमरे से बाहर न जा सके। सबसे पहले हैलमेट के नीचे से उन्होंने उसे निकाला और बाहर रख दिया। वे उसके साथ खेलना चाहते थे। उसके व्यवहार को समझना चाहते थे। बाहर निकलते ही चिड़िया के बच्चे ने एक ऊँची उड़ान भरने की कोशिश की और वह कमरे की सैल्फ के ऊपर जा बैठा। वहाँ से उड़ा तो अलमारी के ऊपर बैठ गयाजब नमन ने उसे पकड़ने की कोशिश की तो खिड़की के पल्ले के ऊपर जा बैठा। जब दोनों भाई-बहन उसे पकड़ने के लिए आगे बढ़े तो वह एक और हल्की -सी उड़ान के साथ हैंगर के पिन पर टिककर जा बैठा। वह अब इस कैद से बाहर निकलना चाहता था। जिस तरफ उसे रोशनी दिखती वह उस ओर उड़ान भरता रहा। लेकिन हर बार असफल ही रहा।

अब की बार वह कमरे की दिवार से टकराकर नीचे आ गिरा था। आजादी के लिए तय की गई इन उड़ानों ने उसे थका दिया था। इस बार वह नमन के हाथ भी लग चुका था। नमन ने बड़े प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और दोनों भाई-बहन उसे प्यार से देखने लगे। भाई-बहन उसे हाथ में लेकर बहुत रोमांचित हो रहे थे। चिड़िया कमरे के बाहर अपने बच्चे की आवाज सुनकर बार-बार कमरे के पास लौट रही थी। परंतु वे दोनों तो उसे अभी बाहर भेजने के जरा भी मूड़ में नहीं थे। अब अंधेरा भी होने लगा था। पापा ड्यूटी से घर आ चुके थे। पापा ने उन्हें चिड़िया के बच्चे को सही ढंग से रखकर स्कूल का कार्य करने के लिए उनके कमरे में भेज दिया था।

आज वक्त अगली सुबह का था। चिड़िया का बच्चा चू चूं का शोर कर रहा था। चिड़िया अपने बच्चे की पुकार सुनकर कमरे के इर्द गिर्द उड़ उड़कर उसे अपने होने की तसल्ली देते हुए उसके बाहर निकालने का रास्ता तलाश कर रही थी। दोनों माँ और बेटा सिर्फ दोनों माँ और बेटा सिर्फ खिड़की के काँच से ही आर-पार एक- दूसरे को देखकर अपनी मजबूरी पर दुखी हो रहे थे।

दादा ने आज नमन को फिर समझाया कि बेटा, हमें चिड़िया के बच्चे को छोड़ देना चाहिएकिसी बच्चे को अपनी माँ से दूर करके उसे कैद में रखना जरा भी सही नहीं है। देखो, बेचारी चिड़िया कल से कितनी परेशान है।

लेकिन दोनों भाई-बहन कहाँ मान रहे थे। वे तो अभी इसके साथ जी भरकर खेलना चाहते थे।

चिड़िया के बच्चे को अपने पास रखते हुए उन्हें आज तीसरा दिन था। आज भी नमन जब स्कूल से फटाफट आगे-आगे घर पहुँचा तो उसकी माँ और दादा जी घर पर नहीं थे। आज दादी अकेली उनका इंतजार कर रही थीदादी ने दोनों के घर पहुँचते ही बताया कि उसकी माँ को आज पेट में काफी दर्द हुआ। पापा ड्यूटी पर थे। इसलिए तेरे दादा ही माँ को अस्पताल लेकर गए हैं। फोन पर दादा जी ने बताया कि माँ को पत्थरी की शिकायत है। दर्द अभी भी पूरी तरह से रुका नहीं है। इसलिए माँ को एक-दो दिन अस्पताल में ही रुकना पड़ेगा।

यह सब सुनकर नमन और नैंसी का मन उदास हो गया। आज वे चिड़िया के बच्चे के साथ भी नहीं खेले। शाम तक दादा जी भी घर आ चुके थे। अब वहाँ माँ के पास उनके पापा थे। शाम ढल रही थी। माँ के बगैर नमन और नैंसी को घर खाली खाली लग रहा था। दादी ने दोनों बच्चों को खाना खिलाकर आज अपने पास ही सुला दिया था। नैंसी तो कुछ देर मां की याद करते हुए सो गई लेकिन नमन को मां और पिता जी के बगैर जरा भी नींद नहीं आ रही थी। वह रात में भी बार-बार दादा को उसे माँ के पास ले जाने की जिद कर रहा था। अस्पताल घर से दूर था इसलिए दादा उसे सुबह ले जाने को कह रहे थे। रात भर नमन को तसल्ली भर नींद नहीं आई। इस माहौल में उसे रह रहकर चिड़िया और उसके बच्चे की याद सताती रही।

जब सुबह नमन की नींद खुली तो वह सबसे पहले चिड़िया के बच्चे वाले कमरे में गया और उसको हाथ में लेकर कमरे से बाहर निकल गया। चिड़िया भी वहीं उड़ रही थी। नमन चिड़िया के बच्चे के ऊपर प्यार से हाथ फेरते हुए हल्के स्वर में बोला, “सॉरी दोस्त, मैंने तुम्हे इतने दिन कैद में रखा। अपनी माँ से भी मेरे लिए माफी माँगनामैं तुम्हारा दर्द बहुत देर बाद समझ सका। लेकिन अब तुम आजाद हो मेरे नन्हे दोस्त। तुम्हे तुम्हारा आकाश मुबारक हो'

नमन ने चिड़िया के बच्चे को खुले आसमान की तरफ छोड़ दिया थाइस वक्त तक नैंसी भी बिस्तर से उठ चुकी थी। वह भी नन्हे दोस्त को अपनी माँ के संग उड़ता हुआ देख उसे बाय-बाय कह रही थी।

ब्रेकफास्ट करने के उपरांत अब नमन और नैंसी भी माँ से मिलने दादा के साथ अस्पताल की ओर चल पड़े थे।