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सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्मांग-चक्र
November 1, 2018 • Rahul Singh Rathod

लाैहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर, 1875 को गुजरात में नडियाद नामक स्थान पर हुआ था। इनके जन्म-समय को लेकर विद्वानों में मतभेद है। कुछ विद्वान् इनका जन्म-समय शाम 19:23:32 मानते हैं तो कुछ विद्वान् 17:56:00 के पक्ष में तर्क देते हैं। मैंने दोनों कुण्डलियों का तुलनात्मक अध्ययन किया और इस नतीजे पर पहुँचा कि 19:23:32 वाली वृष लग्न की कुण्डली ही सही है। इस कुण्डली में लग्नेश शुक्र, पञ्चमेश बुध, चतुर्थेश सूर्य और एकादशेश गुरु- चारों षष्ठ भाव में चले गए। हैं। सप्तम भाव में वृश्चिक राशि में बैठा नीच का चन्द्रमा लग्न को देख रहा है। नवम भाव में मकर राशि में उच्च का मंगल स्वराशिस्थ शनि के साथ विराजमान है। राहु एकादश भाव में मीन राशि में और केतु पञ्चम भाव कन्या राशि में स्थित है।

जिन विद्वानों ने इनका जन्म-समय 17:56:00 माना, उसके पीछे भावना यह रही होगी कि इससे मेष लग्न की कुण्डली बन जाती है और प्रथम दृष्टया ही कुण्डली में राजयोगों की भरमार दिखने लग जाती है। इस कुण्डली में तीन-तीन पंच महापुरुष राजयोग एकसाथ बन जाते हैं। दशम भाव में मकर राशि में उच्च के मंगल से रुचक योग, स्वराशिस्थ शनि से शश योग और सप्तम भाव में अपनी मूलत्रिकोण तुला राशि में स्थित शुक्र से मालव्य योग का निर्माण हो जाता है। यही नहीं, शास्त्रों में जितने राजयोग मेष लग्न के लिए बताए गए हैं, उतने अन्य लग्नों के लिए नहीं बताए गए हैं। शायद यही कारण रहा होगा कि कुछ विद्वानों ने वृष लग्न के स्थान पर मेष लग्न का चुनाव करना अधिक उचित समझा।

ऊपर से देखने पर मेष लग्न की कुण्डली ही अधिक प्रभावशाली प्रतीत होती है, पर जैसे ही हम नवमांश और दशमांश कुण्डलियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हैं, तो पाते हैं कि उनकी वृष लग्न की कुण्डली ही अधिक दमदार है, जो उनके जन्म का सही समय भी है। व्यक्ति अपने कर्मों से संसार में जाना जाता है, इसलिए प्रोफेशन, पद, प्रतिष्ठा को दर्शानेवाली दशमांश कुण्डली का सशक्त होना बहुत आवश्यक है। सरदार पटेल की दशमांश कुण्डली में नवमेश गुरु, राहु के साथ लग्न में बैठा है; लग्नेश मंगल दसवें भाव में उच्च का होकर मकर राशि में बैठा है। तृतीय भाव का स्वामी बुध एकादश भाव में है और एकादश भाव का स्वामी शनि तृतीय भाव में है। यह एक जबरदस्त परिवर्तन योग है। कुण्डली में तीसरा भाव कम्युनिकेशन और संचार माध्यमों का प्रतिनिधित्व करता है। यही कारण है कि उन्हें 2 सितम्बर, 1946 को भारत के अंतरिम सरकार के गठन के समय से ही गृह के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गयी।

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