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सक्षम एवं दूरदर्शी अध्यात्मविज्ञानी
July 1, 2017 • L. Karnal Atam Vijay Gupta

समाज के अन्दर परिवर्तन में आध्यात्मिक वैज्ञानिकों की महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। जब हम शब्द-परिवर्तन का उपयोग करते हैं, तो इसका अर्थ है कि सामाजिक सोच का फिर से उन्मुखीकरण कर लालच से आवश्यकता की अवधारणा में स्थानांतरित करना।

इस तरह की कार्यवाही चुनौतीपूर्ण है, मौजूदा वातावरण में तो और अधिक, जहाँ पूर्व पूर्व तर्कसंगतता और तर्क का, विश्वासों द्वारा प्रतिस्थापित आधा परीक्षण किया गया, जो केवल व्यावसायिक विचारों के अनुरूप है। आज की दुनिया में जब हर विचार, हर क्रिया, हर कार्यवाही का झुकाव व्यापारिक है और आध्यात्मिकता की ओर दिमाग से रहित व्यापार की तरफ झुकाव अधिक है, आध्यात्मिक वैज्ञानिकों को अद्वितीय नेतृत्व-गुणों को प्राप्त करना आवश्यक है। उन्हें युवा-पीढ़ी को समझने के लिए एक प्रारूप, शैली और दृष्टिकोण चुनना होगा कि भविष्य में एक एकीकृत व्यक्तित्व और संतुलित मन प्राप्त करने में निहित है।

स्वामी योगानन्द परमहंस की भविष्यवाणी है कि आध्यात्मिकता और भौतिक रूप से विकसित देश ही दुनिया का नेतृत्व करेगा। ऐसा प्रतीत होता है कि प्राचीन शोध और आधुनिक प्रयोग किए जानेवाले विज्ञान को मानव जाति के भविष्य के जीवन की अवधारणाओं को विकसित करने के लिए आगे बढ़ना होगा। इस तरह की विकसित अवधारणाएँ केवल मानव-प्रजाति को विलुप्त होने में मदद नहीं कर सकती हैं, बल्कि आधुनिक, युवा और भावी पीढ़ियों द्वारा जीवन के रूप में अनुकूलित करने के लिए समान रूप से आकर्षक साबित होंगी। इस विकसित अवधारणा को हमारे मूल ग्रंथों के बारे में बखूबी महत्त्वपूर्ण बुनियादी और मूलभूत मानकों पर आधारित होना चाहिए।

प्रकाश और ध्वनि प्रकृति की ऐसी दो बुनियादी शक्तियाँ दिखाई देती हैं, जिसके निर्माता ने पूरे ब्रह्माण्ड को विकसित करने, बनाए रखने और समाप्त करने के लिए उपयोग किया है। हमारे ग्रंथों ने अक्सर यह बताने का प्रयास किया है कि प्रकाश से हम उभरे हैं और प्रकाश में हमें समाप्त हो जाना है। हाल ही में व्यावहारिक वैज्ञानिकों ने पाया और दिखाया है कि पूरी आणविक संरचना का आधार भौतिक रूपों को प्राप्त करने के लिए हो रहा है। एक प्रयोग में बताया गया हैकि एक पेड़ के पत्ते की तस्वीरें इलेक्ट्रो कैफ्लोग्राफ के माध्यम से ली गई थीं। पत्तियों के शीर्ष आधे हिस्से को काटने के बाद भी पत्तियों का अस्तित्व अभी भी मौजूद था। हममें से बहुत से लोगों ने देखा है कि प्रकाश के माध्यम से चित्र लिए जाते हैं। सरल उदाहरण कैमरा या चलचित्र है जो आपको वास्तविकता का बोध कराते हैं।

केरेलीय फोटोग्राफी चित्रों को लेती है और वह मानव आभा को चित्रित करती है। सरल योग-तकनीकों ने मनुष्य के लिए आध्यात्मिक नज़र (छठी आँख) को देखने के लिए संभव बना दिया हा जा बना दिया है। जो लोग आध्यात्मिक नजरिया देखना चाहते हैं, वे एसआरएफ लॉस एंजिलस (यूएसए) या योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ़ इण्डिया, राँची द्वारा जारी किए गए पाठ पढ़ सकते हैं।

प्रकाश हर तरह से पृथिवी ग्रह पर जीवन को कायम करता है। बिना प्रकाश के जीवन संभव नहीं है। प्रकाश की पहुँच, दृश्य के हिस्से के अलावा यह नैनो मीटर रेंज में आवृत्तियों को बढ़ाता है जो विभिन्न रंगों द्वारा मानव-शरीर को प्रभावित करता है, जिसमें हीलिंग और साथ-ही-साथ गैर-हीलिंग भी शामिल है। विद्युत-चुम्बकीय तरंगों, एक्स-रे और ब्रह्माण्डीय किरणों ने मनुष्य और पौधों- दोनों के लिए अलग-अलग उपयोगिता प्राप्त की है। 

ब्रह्माण्ड के ट्रिलियन्स रहस्यों में, सबसे अभूतपूर्व प्रकाश है। ध्वनि-तरंगों के विपरीत, जिनके संचरण के लिए हवा, आकाश या किसी अन्य गतिशील साधन की आवश्यकता होती है, प्रकाश अंतरस्थल अंतरिक्ष के निर्वात के माध्यम से स्वतंत्र रूप से गुजरता है। प्रकाश सर्वाधिक सूक्ष्म और किसी भी प्राकृतिक एवं भौतिक निर्भरता से स्वतंत्र रहता है। महान् वैज्ञानिक आइंस्टीन ने लगभग साबित कर दिया है कि प्रकाश ही एकमात्र तत्त्व है जो ब्रह्माण्ड में निरन्तर प्रवाह करता है। इस दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए, आध्यात्मिक वैज्ञानिकों, दूरदर्शी एवं सक्षम नेताओं को युवा पीढ़ी पर ध्यान देते हुए उनके आध्यात्मिक नज़रिए का उपयोग कर दुनिया में शान्ति स्थापित करने में पहल करनी चाहिए। इस पीढ़ी को जब अध्यात्म में लाया जाएगा, तभी तो सामञ्जस्यपूर्ण वर्तमान और भावी पीढ़ियों की श्रृंखला पैदा होगी।

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