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विद्यार्थी-जीवन : बुद्धित्व का जीवन
July 1, 2017 • Dr. Bharat Singh 'Bhrat'

मनुष्य योनि में विद्यार्थी-जीवन सर्वोत्तम जीवन होता है। प्राचीन काल में पाँच वर्ष पूरा करते ही गुरुकुलों में पढ़ने के लिए भेज दिया जाता था। उस समय विद्यार्थी को शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, अध्यात्मिक दृष्टि से सबल बनाया जाता था। गुरुकुलों में नैतिक, सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक, शिक्षा दी जाती थी।

आज नवीन युग में बच्चों को ढाई या तीन साल का पूरा होते ही स्कूल भेज दिया जाता है। उसे वह शिक्षा दी जाती है जिससे उसे नौकरी मिले। उसे नैतिक, शारीरिक विकास, धार्मिक, आध्यात्मिक शिक्षा से वंचित रखा जाता है, इसीलिए वह बड़ा होने पर अपने को भिन्न, अक्षम, अयोग्य, चिन्तित, असहाय महसूस करता है।

विद्यार्थी-जीवन में बुद्धि का प्रयोग सर्वाधिक होता है। आपने देखा होगा कि कुछ विद्यार्थी तेज, बुद्धिमान होते है तथा कुछ मन्दबुद्धि होते हैं। मन्दबुद्धि होने के कई कारण होते हैं, उदाहरणार्थ

स्मृति कमजोर होना।

जन्मजात से संस्कारवश मन्दबुद्धि होना ।

गर्भावस्था में बच्चे के सिर पर चोट लग जाना ।

जन्म के बाद बच्चे के गिरने या चोट लगने के कारण। 

उचित नींद न लेने से में पढ़ाई के बोझ से डिप्रेस होना। 

मानसिक बीमारी होना। 

अपुष्ट भोजन, विटामिन, पोषक तत्त्वों की कमी से।

 अप्राकृतिक लालन-पालन, रहन- सहन। 

नसे का सेवन, धूम्रपान, मदिरापान करने से। 

दवाओं के दुष्प्रभाव से।

 अशुद्ध, अनैतिक वातावरण में रहने से। 

गर्भावस्था में माता के हॉरमोन्स- परिवर्तन के कारण।

माता-पिता से वंशानुगत बच्चे पर प्रभाव।

 समय से पूर्व जन्म होने के कारण। 

अधिक समय एकान्त में रहने से।

प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा स्मरण-शक्ति बढ़ाना : प्रकृति हमारी जननी है। छोटे बच्चे प्रकृति की गोद में ही खेल-कूदकर बड़े होते हैं। अतः बच्चों का सभी तरह का उपचार प्रकृति में ही स्थित है। अतः प्राकृतिक चिकित्सा से बुद्धि कुशाग्र कर सकते हैं।

प्रातः जागरण एवं भ्रमण : विद्यार्थियों को प्रातः एक निश्चित समय पर उठना चाहिए। प्रातः 2-4 गिलास पानी पिएँ, पेट साफ़ होगा। प्रातः की मधुर बेला पर बाग, उपवन, वाटिका का भ्रमण करें, शुद्ध ऑक्सीजन मिलेगी, दिमाग के लिए लाभदायक होगा।

प्राणायाम : विद्यार्थियों को प्रातः खुली हवा में प्राकृतिक स्थान पर (पार्क, खेत, वन में) बैठकर भस्त्रिका, कपालभाति, अनुलोम- विलोम तथा भ्रामरी प्राणायाम करना चाहिए। इससे तन-मन स्वस्थ होगा, इम्यून पावर बढ़ेगी, रक्त ऑक्सीकृत होगा तथा मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा, बुद्धि कुशाग्र बनेगी।

योगासन : छात्रों को प्रातः ताड़ासन, अर्धचन्द्रासन, पद्मासन, गरुडासन, पश्चिमोत्तानासन, गोमुखासन, अर्धमत्स्येन्द्रासन, भुजंगासन, धनुरासन, नौकासन, चक्रासन, वज्रासन आदि योगासन सीखकर थोड़ी-थोड़ी देर लगभग आधा घंटे में पूरा करें। योगासन करने से शरीर स्वस्थ होगा, बीमारियाँ नहीं आएँगी, मस्तिष्क की नाड़ियों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा, स्मरण-शक्ति तेज होगी।

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