योग द्वारा पाएं हृदय रोग से मुक्ति
July 27, 2019 • योगाचार्य डा. बिपिन पतंजलि

मानव शरीर का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है हृदय,जिसका स्वस्थ रहना और सुचारु रुप से काम करते रहना अति आवश्यक है लेकिन मौजूदा दौर के में प्रायः लोग अपने आहार विहार एवं जीवनशैली को लेकर लापरवाही बरतते हैं जिसका हृदय पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और हृदय संबंधी रोग अपना शिकार बना लेते हैं । ह्रदय संबंधी रोगों के व्यापक प्रकोप का इस बात से अनुमान लगाया जा सकता है कि अब हमारे देश में 30 वर्ष से कम आयु के 10% व्यक्ति इनसे पीड़ित हो रहे हैं।जो कि गंभीर चिंता का विषय है अतः जीवन रक्षा हेतु तथा हृदय को निरोग रखने के लिए उचित जीवन शैली अपनाने की जरूरत है ओर हृदय रोग से मुक्ति पाने मैं आहार की सबसे अहम भूमिका होती है जब कोई व्यक्ति अधिक वसा युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करता है और शारीरिक श्रम बिल्कुल नहीं करता इस कारण से शरीर में अधिक मात्रा में वसा अर्थात चरबी संचित होती है ।

बसा कोशिकाओं की वृद्धि बचपन से होने लगती है बच्चों को अधिक स्वस्थ बनाने के लिए माता-पिता खूब खाना खिलाते हैं तथा अधिक पोस्टिक वसायुक्त पदार्थ खिलाने से बचपन में वसा कोशिका में वृद्धि करती है ,जो सदैव बढती जाती है इस प्रकार बसा कोशिकाएं बढ़ने से मोटापा बढ़ता है मोटापा अपने आप में एक कष्टदायक रोग तो है ही साथ ही अनेक रोगों को भी जन्म देता है मोटापा के कारण से हृदय संबंधित रोगों की उत्पत्ति होती है | भोजन में घी तेल मक्खन आदि से बने खाज पदार्थों की मात्रा कम करके बता कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है भोजन में वसा युक्त खाद पदार्थों की मात्रा कम करके हानिकारक कोलेस्ट्रॉल की वृद्धि को भी रोका जा सकता है । वसायुक्त खाज पदार्थों का अधिक मात्रा में सेवन करण से हानिकारक कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है और यह कोलेस्ट्रोल हृदय रोग की वजह बनता है। मोटापे से बचकर हृदय संबंधित रोगों से भी अपना बचाव किया जा सकता है वसायुक्त चटपटे और मिर्च मसालेदार चीजों का सेवन कम करने तथा फल सब्जियों का सेवन प्रचुर मात्रा में करने से मोटापा के साथ हदय रोग से भी मुक्ति मिलती है।

महानगरों में रहने वाले लोग वायु प्रदूषण के कारण हृदय रोग से पीड़ित होते हैं । छोटे बच्चे भी प्रदूषित वातावरण में सांस लेने के कारण कम उमर में ही हृदय रोग के शिकार बन रहे हैं सूर्योदय के समय किसी पार्क मैं जाकर भ्रमण करने से शुद्ध वायु की समुचित आपूर्ति होती है जिससे शुद्ध रक्त धमनियों में दौड़ता है,तो ह्रदय लंबे समय तक निरोग रहता है विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषित वायु के कारण रक्त धमनियां कठोर हो जाती है जिससे हार्टअटैक की संभावना बढ़ जाती है शरीर में शुद्ध वायु अर्थात ऑक्सीजन की समुचित आपूर्ति के लिए प्राणायाम करना चाहिए, जिससे जीवनीशक्ति प्राप्त होती है और ह्रदय रोग में सुधार होता है।

शुद्ध वायु का संचार होता है सूर्योदय के समय प्राणायाम का अभ्यास विशेष रुप से लाभप्रद होता है अनुलोम विलोम प्राणायाम का अभ्यास करने से बात, पित और कफ तीनों में संतुलन स्थापित होता है। बात, पित और कफ के प्रकोप से रक्त वाहिनी में अवरोध उत्पन्न होता है हृदय रोगियों की धमनियों में कोलेस्ट्रॉल एकत्र होने से हृदय रोग उत्पन्न होता है, जो अनुलोम विलोम प्राणायाम के अभ्यास से दूर होता है।

कपालभाती प्राणायाम के अभ्यास से हृदय की कार्य क्षमता विकसित होती है और फेफड़ों की संकुचन और प्रसारण की क्षमता बढ़ती है इसके अलावा आसनों के अभ्यास से भी हृदय को लाभ मिलता है, और हृदय की कमजोरी दूर होती है । आसनों में शवासन का अभ्यास हृदय रोगियों के लिए बहुत लाभकारी है। हरी पत्तेदार सब्जियां रेशेदार फल अंकुरित चने अंकुरित मूंग आदि हृदय के लिए बहुत ही लाभ प्रद है लौकी की सब्जी हृदय के लिए बहुत लाभकारी होती है योगाभ्यास के तौर पर ओमकार का जाप, शवासन भुजंगासन मकरासन के साथ साथ अनुलोम विलोम प्राणायाम कपालभाती प्राणायाम भमरी प्रणायाम बहुत लाभकारी है।