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महाभारत में हैं नगरस्थापत्य के उल्लेख
November 1, 2016 • Praveen Kumar dirvedi

महर्षि वेदव्यास प्रणीत जय, भारत तथा महाभारत नाम से प्रवाहित सुप्रसिद्ध एवं यथार्थवादी ग्रन्थ, विश्वकोश, स्मृतिग्रन्थ, पंचमवेद, विश्व के सबसे विशाल महाकाव्य (प्रायः एक लाख दस हजार श्लोक) की प्रसिद्धि सम्प्रति भारत, नेपाल, इण्डोनेशिया, श्रीलंका, जावा, जकार्ता, थाईलैण्ड, तिब्बत और म्यान्मार आदि देशों में है। यह 18 पर्वो तथा 100 उपपर्यों में निबद्ध है। इसमें आध्यात्मिक, आधिदैविक और आधिभौतिक- सभी विषयों का निदर्शन प्राप्त होता है।

नगर-स्थापत्य सम्बन्धी अनेक उद्धरण इस विश्वग्रन्थ में प्राप्त होते हैं। इस ग्रन्थ में वर्णित प्रायः 35 से अधिक नगर आज भी विद्यमान हैं। महाभारतकालीन नगरों में प्रमुख रूप से गांधार (पाकिस्तान के रावलपिण्डी से लेकर अफगानिस्तान तक विस्तार, धृतराष्ट्र की पत्नी गांधारी गांधार के राजा सुबल की पुत्री, गांधारी के भाई शकुनी दुर्योधन के मामा), तक्षशिला (गांधार देश की राजधानी, ज्ञाननगरी, वर्तमान में रावलपिण्डी शहर), कैकय प्रदेश (सम्प्रति जम्मू-काश्मीर के उत्तर में अवस्थित, कैकय प्रदेश के राजा जयसेन का विवाह वसुदेव की बहन राधादेवी के साथ, उनका पुत्रमशंकर शिवलिंग की स्थापना), शिविप्रदेश (आज जरासंध दुर्योधन का मित्र, महाभारत-युद्ध में जरासंध ने कौरवों का साथ दिया), मद्रदेश (आज का जम्मू-काश्मीर, इसका दूसरा नाम उत्तरकुरु, इस देश के राजा शल्य की बहन माद्री का विवाह राजा पाण्डु से हुआ था, नकुल और सहदेव माद्री के पुत्र) उज्जनकप्रदेश (आज का नैनीताल, द्रोणाचार्य का अस्त्र-शस्त्र-प्रशिक्षण केन्द्र, भीम द्वारा भीमशंकर शिवलिंग की स्थापना), शिविप्रदेश (आज का दक्षिणी पंजाब, इस प्रदेश के महाराज उशीनर के पौत्र शैव्य की पुत्री का विवाह युधिष्ठिर से, महान् धनुर्धारी शैव्य ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में पाण्डवों का साथ दिया था), बाणगंगाप्रदेश (महाभारत के युद्ध में भीष्म जिस स्थल पर शरशैय्या पर इच्छामृत्यु को प्राप्त किये, कुरुक्षेत्र के पास), कुरुक्षेत्र (आज के हरियाणा का अम्बाला प्रदेश, यहाँ के ब्रह्मसरोवर में महाभारत-युद्ध से पूर्व भगवान् श्रीकृष्ण सहित सभी ने स्नान किया था), हस्तिनापुर (आज का उत्तरप्रदेश राज्य के मेरठ (मयराष्ट्र) के आस-पास का प्रदेश, चन्द्रवंशीय राजाओं की राजधानी, महाभारत-युद्ध के बाद पाण्डवों की राजधानी), वर्णावतप्रदेश (मेरठ (मयराष्ट्र) के समीप, पाण्डवों को मारने के लिए दुर्योधन द्वारा लाक्षागृह का निर्माण, गंगा नदी के समीप, पाण्डवों द्वारा मांगे जानेवाले पाण्डवों द्वारा मांगे जानेवाले पाँच गाँवों में वर्णावत भी, आज भी वर्णावा नामक लप्रदेश (हिमालय की तराई का क्षेत्र, राजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी का विवाह अर्जुन से, द्रौपदी का विवाह अर्जुन से, द्रौपदी का अपर नाम पाञ्चाली भी), इन्द्रप्रस्थ (आज की दक्षिणी दिल्ली का क्षेत्र, इस स्थान पर दिल्ली का क्षेत्र, इस स्थान पर वियावान-अरण्य का नाम नाम खाण्डववन, विश्वकर्मा की सहायता से पाण्डवों द्वारा राजधानी बनायी गयी, आज भी इन्द्रप्रस्थ विद्यमान), वृन्दावन (मथुरा के समीप, श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का स्थल, बांके-बिहारी आदि प्रसिद्ध मन्दिर), गोकुल (मथुरा के समीप, कंस से रक्षा के लिए वसुदेव ने अपने मित्र नंदराय के पास कृष्ण को छोड़ दिया था, यहीं कृष्ण और बलराम का लालन-पालन हुआ), बरसाना (मथुरा के समीप, श्रीराधा की कर्मस्थली), मथुरा (यमुना नदी के समीप, कंस के कारागार में श्रीकृष्ण का जन्म, बाद में श्रीकृष्ण द्वारा कंसवध, बाद में कृष्ण के पौत्र वृजनाथ को मथुरा का उत्तराधिकारी बनाया गया), अंगदेश (वर्तमान बिहार के भागलपुर और मुंगेर का क्षेत्र, जरासंध ने दुर्योधन को अंगदेश उपहार में दिया, बाद में दुर्योधन द्वारा कर्ण को इस प्रदेश का राजा बनाया गया), कौशाम्बी (वत्सदेश की राजधानी, वर्तमान में इलाहाबाद के समीप अवस्थित, इसके नगरवासियों ने महाभारत-युद्ध में कौरवों का साथ दिया, कौरवों द्वारा कौशाम्बी पर अधिकार, परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने कौशाम्बी को अपनी राजधानी बनाया), काशी (महान् शिक्षा केन्द्र, पितामह भीष्म द्वारा अम्बा, अम्बिका और अम्बालिका को जीतकर ले जाना, विचित्रवीर्य से विवाह के पश्चात् धृतराष्ट्र और पाण्डु का जन्म, धृतराष्ट्र के पुत्र कौरव और पाण्डु के पुत्र पाण्डव), एकचक्रानगरी (वर्तमान बिहार का आरा जिला, लाक्षागृह से बच निकलने पर पाण्डवों का निवासस्थान, भीम द्वारा बकासुरवध, युधिष्ठिर के अश्वमेध-यज्ञ के अश्व को बकासुर के पुत्र भीषक ने पकड़ लिया, बाद में अर्जुन द्वारा भीषकवध), मगधप्रदेश (वर्तमान दक्षिण बिहार में विद्यमान मगध-नरेश जरासंध का राज्य, कंस का जरासंध की दोनों पुत्रियों- अस्ती और प्राप्ति से विवाह, कंसवध के बाद जरासंध द्वारा अनेक बार मथुरा पर आक्रमण, बाद में मल्लयुद्ध में भीम द्वारा जरासंध का अन्त), पुण्डरु देश (वर्तमान बिहार में इस स्थान का राजा पौण्ड्रक जरासंध का मित्र, वह स्वयं को कृष्ण, वासुदेव और पुरुषोत्तम कहता था, द्रौपदी-स्वयंवर में भी विद्यमान था, द्वारका पर हुए आक्रमण में वह श्रीकृष्ण के हाथों मारा गया), प्राग्ज्योतिषपुर (वर्तमान में असम राज्य का गुवाहाटी प्रदेश, यहाँ के राजा नरकासुर ने 16 हजार कन्याओं को बन्दी बनाया, बाद में श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और उन कन्याओं से विवाह किया, कहा जाता है कि कामाख्या देवी का मन्दिर नरकासुर ने बनवाया था), कामाख्याप्रदेश (गुवाहाटी के समीप, सतीदाह के पश्चात् शिव सती के मृत शरीर को लेकर ताण्डव कर रहे थे, विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के मृत शरीर के कई टुकड़े किए, सती के 51 टुकड़े गिरने से 51 शक्तिपीठ बने, कामाख्या भी शक्तिपीठ है), मणिपुर (मणिपुर के राजा चित्रवाहन की पुत्री चित्रांगदा का विवाह अर्जुन के साथ, इस विवाह से उत्पन्न पुत्र बभ्रुवाहन, बभ्रुवाहन द्वारा अर्जुन का वध, बाद में श्रीकृष्ण द्वारा जीवित किया गया), सिंधुदेश (सिंधुदेश के राजा जयद्रथ का विवाह धृतराष्ट्र की पुत्री दुःशला से हुआ था, अभिमन्यु की मृत्यु का प्रमुख कारण, महाभारत-युद्ध में कौरवों का साथी), मत्स्यदेश (वर्तमान राजस्थान का उत्तरी भाग, इसकी राजधानी विराटनगरी, विराट के सेनापति और साले कीचक की द्रौपदी पर कुदृष्टि होने के कारण भीम द्वारा उसका वध, अज्ञातवास के समय पाण्डवों का वेश बदलकर इस राज्य में निवास, अभिमन्यु का विवाह विराट की पुत्री उत्तरा से), मुचुकुन्द तीर्थ (वर्तमान धौलपुर राजस्थान, मथुराजीत के बाद कालयवन ने श्रीकृष्ण का पीछा किया और श्रीकृष्ण ने स्वयं को एक गुफा में छिपा लिया, इस गुफा में मुचुकुन्द सो रहे थे, उनपर कृष्ण ने पीताम्बर डाल दिया, जैसे ही मुचुकुन्द को कालयवन ने जगाया तो शाप के कारण वह जलकर भस्म हो गया), पाटन (गुजरात का पाटन महाभारत-काल में प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्र, इसके समीप भीम द्वारा हिडिम्ब राक्षस का संहार, उसकी बहन हिडिम्बा से विवाह, हिडिम्बा से भीमपुत्र घटोत्कच का जन्म और उसके पुत्र बर्बरीक की कथा), द्वारका (गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित यह स्थान कालान्तर में समुद्र में प्रविष्ट हो गया, जरासंध के बार-बार आक्रमण से यदुवंशियों की रक्षा करने के लिए कृष्ण ने मथुरा से अपनी राजधानी द्वारका निर्मित कर स्थानान्तरित कर दी), प्रभाषक्षेत्र (गुजरात के पश्चिमी तट स्थित स्थान पर भगवान् श्रीकृष्ण का निवासस्थान, श्रीकृष्ण के पैर के अंगूठे में तीर लगने के बाद वे गोलोकवासी हो गये और तत्पश्चात् द्वारकानगरी समुद्र में डूब गयी, आज भी विशेषज्ञों के अनुसार समुद्री सतह पर द्वारका नगरी के अवशेष विद्यमान हैं), अवन्तिका (मध्यप्रदेश में अवस्थित उज्जैन, यहाँ भगवान् श्रीकृष्ण के गुरु महर्षि सान्दीपनी का आश्रम था, प्रसिद्ध महाकालेश्वर शिवलिङ्ग द्वादश ज्योतिर्लिङ्गों में एक यहाँ विद्यमान है), चेदीदेश (वर्तमान मध्यप्रदेश का ग्वालियर क्षेत्र तत्कालीन चेदीदेश के रूप में विद्यमान, गंगा और नर्मदा नदी के मध्य स्थित चेदीदेश महाभारतकाल में एक सम्पन्न नगर, इस राज्य पर श्रीकृष्ण के फुफेरे भाई शिशुपाल का राज, शिशुपाल रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था, लेकिन श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर उससे विवाह रचा लिया, युधिष्ठिर के राजसूय-यज्ञ के समय चेदीनरेश शिशुपाल ने श्रीष्ण को बहुत बुरा-भला कहा और अन्ततः श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से उसका वध किया), शोणितपुर (वर्तमान मध्यप्रदेश का इटारसी क्षेत्र, यहाँ के राजा बाणासुर की पुत्री उषा का विवाह श्रीकृष्ण के पौत्र अनिरुद्ध के साथ सम्पन्न) और विदर्भक्षेत्र (महाभारतकाल में विदर्भ क्षेत्र पर जरासंध के मित्र भीष्मक का शासन, रुक्मिणी भीष्मक की पुत्री, श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी का अपहरण कर उनसे विवाह रचाया, इसी कारण भीष्मक उसे अपना शत्रु मानने लगे। युधिष्ठिर द्वारा सम्पादित अश्वमेध-यज्ञ के घोड़े को भीष्मक ने रोका था और अन्ततः सहदेव ने भीष्मक को युद्ध में हरा दिया) आदि नगर थे।

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