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भारत के विश्व धरोहर स्थल
September 1, 2018 • Dr. Smita

आगरे का किला

आगरे के किले को लाल किला भी कहते हैं। वर्ष 1983 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था। यह ताजमहल से करीब 2.5 किलोमीटर दूर है। कहा जाए है कि वर्ष 1565 में मुगल सम्राट् अकबर ने इसका निर्माण करवाया था। प्राचीन काल में आगरा भारत की राजधानी हुआ करती थी। यह शानदार किला यमुना नदी के किनारे बना है। 94 एकड़ में बना यह किला अर्धवृत्ताकार है। इसके चार दरवाजे हैं, किले के दो दरवाजे ‘दिल्ली गेट’ और ‘लाहौर गेट नाम जाने जाते हैं। 

अजन्ता की गुफाएँ

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में पड़नेवाली अजन्ता की गुफाओं में चट्टानों की बनी करीब 30 बौद्ध गुफा स्मारक हैं, जिनका निर्माण द्वितीय शताब्दी ई.पू. से लेकर 480 या 650 ई. तक किया गया था। गुफा में बने चित्र बौद्ध-धर्म की प्रसिद्ध रचनाओं पर आधारित हैं। इसमें भगवान् बुद्ध को भी चित्रित किया गया है और जातक कथाओं का चित्रण भी है। अजन्ता की गुफाएँ 1983 से यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल की सूची में हैं।

एलोरा की गुफाएँ

एलोरा महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले के 29 औरंगाबाद । किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित एक पुरातात्त्विक स्थल है। इसका निर्माण कल्चुरी, चालुक्य और राष्ट्रकूट-राजवंश ने छठी से नवीं शताब्दी के दौरान से कराया था। यहाँ 34 गुफाएँ वास्तव में चारनंद्री पहाड़ियों के लंबवत् हिस्से पर बनाई गई हैं। ये गुफाएँ हिन्दू, बौद्ध और जैन धर्म को समर्पित हैं। 17 हिंदू (गुफा-संख्या 13-29), 12 बौद्ध (गुफ-सं. 112) और 5 जैन (गुफ़ा-सं. 30-34) को एक दूसरे के साथ-साथ बनाया गया है। एलोरा की गुफाओं को 1983 में यूनेस्को ने विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

ताजमहल

उत्तरप्रदेश के आगरा जिले में 17 हेक्टेयर जमीन पर बने मुगल गार्डन के भीतर बना ताजमहल यमुना नदी के किनारे स्थित है। कहा जाता है कि इसका निर्माण मुगल-बादशाह शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज महल की याद में करवाया था। 1632 ई. में इसका निर्माण-कार्य शुरू हुआ था और 1648 में बनकर यह तैयार हो गया था। ताज महल के मुख्य वास्तुकार उस्ताद अहमद लाहौरी थे। इसके निर्माण के लिए पूरे साम्राज्य और मध्य एशिया एवम् ईरान से राजमिस्त्री, पत्थर, काटनेवाले, भीतर की दीवार बनानेवाले, नक्काशीकार, चित्रकारों, सुलेखकों, गुम्बद बनानेवालों और अन्य कारीगरों को बुलाया गया था। यूनेस्को ने इसे 1983 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

महाबलीपुरम् के स्मारकों का समूह

मन्दिरों का यह समूह, पल्लव-राजाओं द्वारा बनाया गया था। 7वीं और 8वीं शताब्दी में कोरोमण्डल के तट के चट्टानों पर खुदाई करवाई गई थी। यह मुख्य रूप से अपने रथों (रथरूपी मन्दिरों), मण्डप (गुफा-अभयारण्य), विशालकाय उभरी हुई नक्काशियाँ, जैसे- गंगावतरण, शिव की महिमा को दर्शाते हज़ारों मूर्तियोंवाले किनारे पर बने मन्दिर के लिए जाना जाता है। यूनेस्को ने इसे 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

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