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बाहुबली 2 पुटाणेतिहास-जाया का पुराणेतिहास-गाथा का अद्भुत फिल्मांकन
December 1, 2017 • Kumar Sanjay ' Shartul'

भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक साथ अनेक कीर्तिमान स्थापित करनेवाली फिल्म 'बाहुबली : द बिगिनिंग' की उत्तरगाथा ‘बाहुबली 2 : द कॉन्क्लूजन' का निर्माण करके एस.एस. राजामौली ने एक ऐसी बृहत्तर रेखा का सृजन कर दिया है, जिसकी स्पर्धा में अभी तक कोई दूसरी फिल्म दृष्टिपथ पर उपस्थित नहीं हो पा रही है। इस फिल्म के विषय में कुछ भी कहने से पूर्व इसके कथानक को जान लेना समीचीन होगा।

माहिष्मती साम्राज्य का स्वामिभक्त रक्षक कटप्पा (सत्यराज) आत्मवृत्त सुनता है कि किस प्रकार उसने अमरेन्द्र बाहुबली (प्रभास) को मारा।।

कालकेय-विजय के पश्चात् अमरेन्द्र बाहुबली को भविष्य का सम्राट् और भल्लालदेव (राणा डग्गुबती) को सेनापति घोषित कर दिया जाता है। राज्याभिषेक होने से पूर्व ही अमरेन्द्र बाहुबली की माँ राजमाता शिवगामी (रम्या कृष्णन) उसके लिए दुल्हन का अन्वेषण कराती हैं। इसी बीच राजमाता शिवगामी साम्राज्य और प्रजा की स्थिति को भली-भाँति समझने का निर्देश अमरेन्द्र बाहुबली और कटप्पा को देती हैं। इसलिए दोनों साम्राज्य-भ्रमण के लिए निकल पड़ते हैं।

कुन्तल साम्राज्य की राजकुमारी देवसेना (अनुष्का शेट्टी) को देखते ही अमरेन्द्र बाहुबली के हृदय में अनुराग की अरुण रश्मियाँ जन्म लेतीं हैं, जो प्रीति पुरातन लखइ न कोई की प्रतीति कराती हैं। यह सम्पूर्ण प्रकरण जैसे ही भल्ललदेव के संज्ञान में आता है, वैसे ही वह अमरेन्द्र बाहुबली के विरुद्ध षड्यन्त्र प्रारम्भ कर देता है। अपनी योजना के अनुसार भल्लालदेव राजमाता शिवगामी से कुन्तल-साम्राज्य की राजकुमारी देवसेना से विवाह करने की इच्छा व्यक्त करता हैअमरेन्द्र बाहुबली और राजकुमारी देवसेना के हृदय में पल रही नैसर्गिक प्रीति से अनभिज्ञ राजमाता शिवगामी भल्लालदेव को राजकुमारी देवसेना से विवाह कराने का वचन दे देती हैं।

जब राजमाता शिवगामी कुन्तल-नरेश के पास परिणय-प्रस्ताव भेजती हैं, तो दूत सन्देश को ऐसे लिखता है जैसे किसी महाघमण्डी व्यक्ति ने लिखा हो। देवसेना इस परिणय- प्रस्ताव को कड़े शब्दों के साथ अस्वीकार कर देती है। जब राजमाता शिवगामी को उसका उत्तर मिलता है, तो वह क्रोध में राजकुमारी देवसेना को बन्दी बनाकर लाने का आदेश दे देती हैं।

कुन्तल-साम्राज्य पर पिण्डारियों का आक्रमण हो जाता है। राजकुमारी देवसेना के भाई राजा कुमार वर्मा की सहायता से अमरेन्द्र बाहुबली उस आक्रमण को विफल करके न केवल कुन्तल को बचा लेता है, अपितु यह भी बता देता है कि वह कौन है। इसी बीच अमरेन्द्र बाहुबली को राजकुमारी देवसेना को बन्दी बनाकर ले आने का राजमाता शिवगामी का सन्देश प्राप्त होता है, किन्तु वह राजकुमारी देवसेना को सब कुछ अनुकूल हो जाने का आश्वासन देकर अपनी वाग्दत्ता पत्नी के रूप में माहिष्मती ले आता है।

जब अमरेन्द्र बाहुबली माहिष्मती पहुँचता है, तब उसे वस्तुस्थिति का पता चलता है। राजमाता शिवगामी उसे सिंहासन या देवसेना में से किसी एक का चयन करने को कहती हैं। ऐसी स्थिति में वह देवसेना को चुनता है। इस कारण भल्लालदेव को माहिष्मती का सम्राट् और अमरेन्द्र बाहुबली को सेनापति बना दिया जाता है, परन्तु माहिष्मती की प्रजा अमरेन्द्र बाहुबली को ही सम्राट् की तरह पूज्य मानती है।

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