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पालें गाय
November 1, 2017 • Veena Singh

समझ में नहीं आ रहा कि यह इतनी सरल बात अभी तक किसी के समझ में क्यों नहीं आई कि गोरक्षा से ही भारत की रक्षा संभव है। बिना मतलब के सब के सब मारे-मारे फिरे हैं। सब के सब क्या, हम भी कुछ अलग नहीं हैं। भई ! यह तो वही बात हुई- बगल में छोरा और जग में ढिंढोरा। या यूं कहिए- कस्तूरी कुंडलि बसै मृग ढूंढई बन माहि। यानि के देश रक्षा का फंडा इतना सरल, हमारे आस-पास ही। फिर भी हम जोखिम उठाते रहे। भटकते रहे। पत्थरों से टकराते रहे। खैर! जब जागो तभी सबेरा। मेरी खोपड़ी में तो बात फिट बैठ गई कि जब पूरा देश गाय से सुरक्षित हो सकता है तो मेरा घर क्यों नहीं? फिर क्या पैसे इकट्ठा कर किसी तरह मैंने गाय खरीद ली। असर भी दिख रहा है। गाय क्या आई, घर मेंएक ओर शुद्ध स्वादिष्ट दूध पीकर बच्चे और पति स्वस्थ हैं, वहीं अम्मा और बाबूजी व्यस्त हैं। पूरे दिन खाली बैठे-बैठे टोका-टाकी करते थे। मोहल्ले में बैठकर प्रपंच करना भी बन्द है। अजी! समय ही कहाँ है। कहीं गाय के चारे का इन्तजाम, कहीं नहलाने-धुलाने का काम, तो कहीं गोबर इकट्ठा कर कंडे थापने का काम। पूरा दिन पुण्य का ही काम। शाम को जब सब एकसाथ बैठते हैं तो न आपस में कोई गिले-शिकवे, न कोई वाद-विवाद। केवल गाय की दिनभर की गतिविधियों की ही बात। अब न पड़ोसियों से तू-तू, मैं-मैं का जोर। न बेलगाम टीवी का शोर। अब हम कोई आवाज़ सुनते है तो सिर्फ गाय के रंभाने की। उसके रंभाने में घर के सुख की अनेक संभावनाएँ छिपी हैं। बाहर से आवाज सुनकर लोग पूछते हैं क्या आपके घर में गाय है? मैं गर्व से सिर ऊँचा करके कहती हूँ, हाँ मेरे घर में गाय है। सच ऐसा कहते हुए इस तरह की अनुभूति होती है जैसे दीवार फिल्म में मेरे पास माँ है।

पहले पड़ोसी कटोरी लेकर चीनी या दही माँगने आते थे, अब वे आकर बोलते हैं क्या थोड़ा-सा गोमूत्र मिलेगा? सच पूछो तो गर्व से सीना चौड़ा हो जाता है। चीनी दही तो मैं कभी किसी को दे नहीं पाई, पर गोमूत्र देन में क्या सुख होता है, जान पाई हूँ। मैं खुश हूँ; क्योंकि मैंने अपने मोहल्ले में गाय पालने की क्रान्ति-सी ला दी है। मेरी देखा-देखी सभी लोग कुत्ते की जगह अब गाय पालने को प्रमुखता दे रहे हैं।

हम तो कहते हैं कि भारत के हर घर में एक गाय का होना अनिवार्य कर देना चाहिए। जब हर घर, हर समुदाय, हर पार्टी के पास गाय होगी, तो न गाय राजनीतिक मुद्दा बन पायेगी और न ही धर्म या जातिगत भेदभाव उत्पन्न होगा। फिर गाय किसी एक की न होकर हर किसी की होगी। यदि भारत की प्रगति, सुस्वास्थ्य, सुरक्षा के लिए आप चिन्तित हैं, तो गाय अवश्य पालें, क्योंकि गाय की रक्षा में ही देश की सुरक्षा निहित है।