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पर्यटन अन्तरिक्ष सैर
September 1, 2018 • E. Hemant Kumar

यदि व्यक्ति घूमने के लिए कुछ समय तक अपने स्थाई आवास से बाहर रहे, तो आज की परिभाषा में उसे पर्यटन माना जाता है। इंसान को आदिकाल पर्यटन माना जाता है। इंसान को आदिकाल से ही घूमने का शौक रहा है। शुरूआती दौर में घूमना मज़बूरी थी, परंतु बाद में अनेक कारणों से यह लोकप्रिय हो गया। जीवों के विकासवाद को माना जाय, तो आदिकाल में मनुष्य भोजन तथा सुरक्षित जगह की तलाश में यहाँ-वहाँ घूमता रहता था। वह लगभग पूरी जिंदगी घूमता था, शायद यह सोचकर कि कोई-न-कोई ऐसी जगह मुझे ज़रूर मिलेगी जहाँ जंगली जानवर, कीट-पतंगें, सांप-बिच्छू नहीं होंगे, भोजन आसानी से मिल जाएगा और घनघोर बारिश, आकाशीय बिजली, असहनीय मौसम का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि ऐसी जगह, तो कभी किसी को नहीं मिली, परंतु समूह में रहने, बस्तियों के निर्माण तथा कृषि आरम्भ करने से उसकी अनेक दिक्कतें कम जरूर हो गयीं। मज़बूरन घुमक्कड़ी के आरम्भिक दौर में उसका सामना कुदरत की अनगिनत विविधताओं, अनेकानेक रंगों और असंख्य पहलुओं से हुआ। कुदरत की यह माया उसे बहुत ही अद्भुत, समझ से परे, विस्मयपूर्ण तथा कुल मिलाकर मनमोहक लगी। यायावरी जिंदगी में आदिमानव को अनेक कठिनाइयाँ और जान का खतरा ज़रूर था, परंतु नयी-नयी जगहों को देखने एवम् उसके अनुकूल बनकर रहने की चुनौती भी उसे बहुत अच्छी लगती थी। बस्तियों में रहने के कारण मनुष्य का खानाबदोश रूप में यहाँवहाँ घूमना लगभग खत्म-सा हो गया। परंतु कुदरत की विविधताओं को देखने का आकर्षण मनुष्य के अवचेतन मन में अपूर्ण इच्छा के रूप में जिन्दा रहा और शायद इसी कारण दुनिया को नज़दीक से देखने की इच्छा आज भी किसी तरह कम नहीं हुई है। अवचेतन मन में दबी पड़ी ये इच्छाएँ, आज के उन व्यक्तियों को भी घूमने के लिए प्रेरित करती हैं, जो बस्तियों में स्थाई एवं सुखी जीवन व्यतीत कर रहे हैं, तथा जिन्हें घूमने की बिल्कुल भी ज़रूरत नहीं है।

यात्रा करना कष्टमय, जीवन पर खतरेवाला तथा महंगा काम है, फिर भी हर कालखण्ड और विश्वभर में लोग यहाँ-वहाँ घूमते रहे हैं, और अनेकों ने लम्बी-लम्बी यात्राएँ की हैं। ज्ञान-विज्ञान, संचार एवं परिवहन की आधुनिक तकनीकों के कारण वर्तमान में पर्यटन-क्षेत्र विकसित होकर काफ़ी आसान, सुरक्षित तथा सुस्पष्ट हो गया है। आज तो विभिन्न प्रकार की यात्राओं को अलग-अलग वर्गीकृत किया जा रहा है। मनोरंजन के उद्देश्य से घूमना, धार्मिक उद्देश्य से घूमना, शिक्षाप्राप्ति एवं ज्ञानवर्धन के उद्देश्य से घूमना, राजनीतिक कारणों से घूमना, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के लिए घूमना, व्यवसाय या नौकरी-सम्बन्धी कार्यों के लिए घूमना, खाली समय व्यतीत करने के लिए घूमना, अंतरिक्ष मिशन, बाहर रह रहे परिजनों से मुलाकात के लिए यात्राएँ, स्थान विशेष या खास उद्देश्य के लिए की गई यात्रा, प्रोत्साहन एवं पुरस्कार-सम्बन्धी यात्राएँ तथा अन्य। इनके अलावा यात्राओं का विकृत रूप भी सामने आया है, जैसे- विश्वविजय के सैन्य अभियान, अन्य सैन्य यात्राएँ, अपराधियों द्वारा छिपने के लिए यात्राएँ, गैरकानूनी कार्यों (मानव, नशीले पदार्थों की तस्करी, आतंकवादी गतिविधियाँ, आदि) से जुड़ी यात्राएँ।

आज तो पुस्तक, टीवी, इंटरनेट-जैसे अनेक आधुनिक संचारमाध्यमों के द्वारा देश-विदेश के बारे में बहुत आसानी से जाना-समझा जा सकता है, परंतु आदिकाल में जब ये नहीं थे तब घूमना-फिरना एवं यात्रा-वृत्तांत ही इन खबरों का मुख्य साधन होता था। इसीलिए यात्रा-वृत्तांत तथा उड़कर या अन्य किसी तरीके से यहाँ-वहाँ पहुँच सकनेवाले किरदार बहुत पसंद किए जाते रहे हैं। विश्व के अनेक प्रसिद्ध ग्रंथों, किस्से- कहानियों में यात्राओं का ज़िक्र हुआ है।

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