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पत्र-लेखन की ऐतिहासिकता
October 1, 2017 • Brajkishor Prasad Singh

मनुष्य जब से लिखने-पढ़ने लगा, तभी से अपने विचारों के आदान- प्रदान का माध्यम ‘पत्र' को बनाया गया। प्रारंभिक दौर में वैचारिक आदान- प्रदान का एकमात्र माध्यम पत्र हुआ करता था। प्रेमी और प्रेमिका के बीच परस्पर संवाद का जरिया पत्र था तो दो देशों या देशी राजाओं के बीच संवाद का माध्यम पत्र ही था।

पत्र भेजने की सुनिश्चित व्यवस्था डाक-विभाग की स्थापना के बाद ही संभव हो सकी है। डाक विभाग ने जब से काम करना शुरू कर दिया, तब से संवाद यानी संदेश प्रेषित करने में कठिनाइयाँ कम हो गयीं।

डाक-व्यवस्था के जन्म से पूर्व पत्र प्रेषित करने का जरिया या तो घुड़सवार सिपाही थे या आकाशमार्ग से पत्र पहुँचानेवाला दूत ‘कबूतर' था। पक्षियों में कबूतर इस मायने में गज़ब का पक्षी है। संदेश पहुँचाने की विश्वसनीयता पर कबूतर ने कभी आँच नहीं आने दी।

मानव के रूप जो दूत पत्र लेकर जाते रहे थे, उनके महत्त्व का क्या कहना है। दूत भी दो प्रकार का कार्य करते थे। एक प्रकार के दूत मौखिक सन्देश पहुँचाते थे तो दूसरे प्रकार के दूत लिखित सन्देश पहुँचाते थे। निश्चित रूप से लिखित संदेश पहुँचानेवाले दूत अधिक महत्त्वपूर्ण माने जाते थे। प्राचीन काल और मध्यकाल में दूत द्वारा सन्देश-प्रेषण का कार्य काफी प्रचलित था। दूसरे पक्ष के पास प्रथम पक्ष संदेश लेकर जाता था और प्रथम पक्ष का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण व्यक्ति उसे ग्रहण करता था। वह दूत प्रथम और द्वितीय पक्ष की समवेत आवश्यकता व अनिवार्यता के केंद्र में होता था। उदय-अस्त, उत्थान-पतन, सामञ्जस्य-असामञ्जस्य, द्विपक्षीय संभावित संघर्ष, द्विपक्षीय संभावित ऐक्य आदि के केंद्र में एकमात्र दूत होता था।

समय करवट लेने लगा। विज्ञान की प्रगति होती गयी। साधन बढ़ते गये। कमसे-कम समय में अधिक-से-अधिक दूरी तय की जाने लगी। ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है कि पुराने हथकंडे व्यर्थ प्रतीत होने लगे। सम्पर्क स्थापित करने के आधुनिकतम साधन उपलब्ध होने से अब पत्र लिखने की या लिखवाने की जहमत झेलने की स्थिति नहीं रही। यद्यपि अनपढ़, अल्पशिक्षित लोगों के लिए आज भी समस्या बनी हुई है और पत्र का मुहताज़ होना पड़ रहा है तथापि अब तो ई-मेल' के ज़रिए (बशर्ते कि पत्र तैयार होना चाहिए) पहुँचाने की समस्या छू-मंतर हो गई है। ‘ई-मेल' से पूर्व और पत्र के मध्य ‘तार' (टेलीग्राम) की व्यवस्था से भी आम आदमी को काफी राहत मिली थी। 

माना कि आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक साधनों ने दुनिया को छोटी बना दिया है। और समय को काफी महत्त्वपूर्ण बना दिया है, लेकिन पत्र लिखना अब भी कम नहीं हुआ है। कुछ क्षेत्र में भले ही पत्र लिखने में कमी आई है, जिसकी भरपाई मोबाइल फोन से हो जाती है, लेकिन सरकारी महकमों में पत्र लिखने का सिलसिला निरंतर चलता रहा है और चलता रहेगा।

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