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धरती पर गोलोक : बंसी गीर गोशाला
March 1, 2018 • Gunjan Aggarwal

पिछले दिनों अहमदाबाद-दर्शन के दौरान ‘बंसी गीर गोशाला' जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जो न केवल गोशाला है, बल्कि राष्ट्रसेवा, वैदिक और आधुनिक शिक्षण समन्वय एवं प्रकृति-संरक्षण के माध्यम से भारतीय संस्कृति को पुनर्जीवित करने का सहज प्रयास है। यह गोशाला अहमदाबाद में शान्तिपुरा सर्कल के पास मेट्रो होलसेल सर्विस रोड पर अवस्थित है। इस गोशाला में भारतीय गीर नस्ल की साढ़े चार सौ अधिक गौमाताओं का पालन-संवर्धन बहुत व्यवस्थित तरीके से हो रहा है। इतना ही नहीं, यहाँ गीर नस्ल के सभी 18 गोत्रों के गोवंश भी संरक्षित किए गए हैं। यह कोई सामान्य गोशाला नहीं, बल्कि इसे धरती पर गोलोक' कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। बंसी गीर गोशाला के संचालक श्री गोपालभाई सुतरिया हैं जो पहले हीरा-व्यापारी रहे हैं। उन्होंने यहाँ गोपालन को पशुपालन से न जोड़कर गावो विश्वस्य मातरः की भावना से जोड़ा है। गोमाताएँ यहाँ उन्मुक्त वातावरण में बंधनमुक्त, निर्द्वन्द्व विचरण करती हैं।

किसी गो को रस्सी या जंजीर से नहीं बाँधा जाता। सभी के अलग-अलग नाम हैं और उनको उसी नाम से पुकारे जाने पर गोमाता रम्भाती है और दौड़ी आती है। गोमाता, बछड़ा, बछिया, बैल और सांड़ यहाँ परस्पर प्रेमपूर्वक रह रहे हैं। सन्ध्या को गोघृत से हवन और गोमाता की आरती होती है।

इस गोशाला में गोचारण की भी समुचित व्यवस्था है। यहाँ के विस्तृत चरागाह में अत्यधिक पौष्टिकता और ऊर्जा देनेवाली घास उगाई जाती है। इसके अतिरिक्त यहाँ गोमाता को स्वास्थ्य और दुग्ध-उत्पादन में वृद्धि के लिए अनेक प्रकार की ओषधियाँ भी दी जाती हैं जिनसे यहाँ का गोवंश अत्यधिक हृष्टपुष्ट है। यहाँ गोदुग्ध पर प्रथम अधिकार उसके बछड़े का है और उससे बचे हुए दूध की ही बिक्री की जाती है। एक-एक गौ 10 से 20 लीटर दूध देती है जो आश्चर्यजनक है। यहाँ संरक्षित किसी गो को कभी भी, किसी भी कीमत पर बेचा नहीं जाता। विदेशों से आए अनेक आकर्षक ऑफरों को ठुकरा दिया गया है।

यह न केवल गोशाला है बल्कि एक अनुसन्धान केन्द्र भी है। यहाँ गोमाता, गोदुग्ध, पञ्चगव्य-सम्बन्धी अनुसन्धान होता रहता है। गवायुर्वेद की सभी मर्यादाओं को ध्यान में रखते हुए पचास से अधिक पञ्चगव्य-उत्पादों का निर्माण और विक्रय होता है। गोपालन और गोसंरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए इस गोशाला को अनेक राष्ट्रीय सम्मानों से समादृत किया गया है।

इसी गोशाला-परिसर में ‘गोतीर्थ-विद्यापीठम्' नामक एक आवासीय गुरुकुल भी सञ्चालित है, जहाँ पूर्णतया वैदिक और पौराणिक ग्रंथों के आधार पर संस्कृत-भाषा में शिक्षा दी जाती है। यहाँ बच्चों को नाड़ीविज्ञान, गोविज्ञान, आयुर्वेद, ज्योतिष, आदि अनेक विद्याएँ भी सिखाई जाती हैं।

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