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देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभाती भारतीय टेल
February 1, 2018 • Rakesh Sharma Nishith

देश के निरंतर विकास में सुचारू व समन्वित परिवहन-प्रणाली की महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है। वर्तमान प्रणाली में यातायात के अनेक साधन, जैसे- रेल, सड़क, तटवर्ती नौ संचालन, वायु-परिवहन इत्यादि शामिल हैं। देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में भारतीय रेल की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। रेल भारत में यातायात का मुख्य साधन होने के साथ ही देश के जीवन का ज़रूरी हिस्सा बन चुकी है। रेलगाड़ियों के आवागमन ने जहाँ हमारे देश की कला, इतिहास और साहित्य पर अद्भुत प्रभाव डाला है, वहीं हमारे देश के विभिन्न प्रांत के लोगों के बीच विविधता में एकता की अहम कड़ी भी है। भारतीय रेल विभिन्न स्थानों को जोड़ती है और लोगों को देश के एक छोर से दूसरे छोर तक बड़े पैमाने पर तेज गति से और कम लागत पर आने-जाने में मदद करती है। इस प्रक्रिया में भारतीय रेल राष्ट्रीय अखण्डता का प्रतीक है।

भारतीय रेल जहाँ अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वाह करने के लिए सामाजिक जरूरतों को ध्यान में रखकर यात्री तथा माल किराया काफी कम लेती है, वहीं आपदा या विपत्तियों के समय में देश की निःस्वार्थ भाव से सेवा भी करती है। विश्व की एकमात्र भारतीय रेलवे है जो कई रेलखण्डों पर घाटा सहकर भी वहाँ यात्री और मालगाड़ी-सेवा परिचालित करती है।

देश में पहली बार 22 दिसम्बर, 1851 को रेलगाड़ी पटरी पर उतरी थी। पहली यात्री-रेल ने 16 अप्रैल, 1853 को बम्बई से ठाणे के बीच 34 किलोमीटर की दूरी तय की थी। वर्ष 1851 से अभी तक रेलवे का योजनाबद्ध विकास हुआ है। भारतीय रेल द्वारा परिसम्पत्ति की उत्पादकता बढ़ाने एवं प्रौद्योगिकी का आधुनिकीकरण करने के लिए अनेक प्रयत्न किए जा रहे हैं। वर्तमान में भारतीय रेल विश्व की चौथी सबसे बड़ी रेल प्रणाली है। इसके पास 64,000 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग है, जिसमें बड़ी लाईन (52,808 किलोमीटर), मीटर गेज लाइन (8,473 किलोमीटर) और छोटी लाइन (2,734 किलोमीटर) शामिल हैं। भारतीय रेल की 13,000 से अधिक रेलगाड़ियाँ रोजाना चार बार धरती से चाँद तक जितनी दूरी तय करती हैं। रेलों के जरिए प्रतिदिन डेढ़ करोड़ से ज्यादा यात्री अपनी मंजिल तक पहुँचते हैं।

बजट-प्रावधान

संविधान के अनुच्छेद 112 के अंतर्गत भारत सरकार की अनुमानित आमदनी और खर्च का विवरण संसद में पेश किया जाता है। रेलवे का वित्त, केन्द्र सरकार के आम बजट से अलग है। इसलिए रेलवे बजट अलग से पेश होता है। इसमें कुल राजस्व, आमदनी, राजस्व और निर्माण-व्यय, खर्च की तुलना में प्राप्तियों के अधिशेष का विवरण और केन्द्र के पास रेलवे की निधियों का विवरण, आदि शामिल होता है। बजट के एक भाग में गत, चालू और आगामी वर्ष के वित्तीय परिणामों का सारांश होता है। दूसरे भाग में निर्माण-मांगों का सारांश होता है। अनुच्छेद 114(3) के अंतर्गत जब तक संसद, विनियोग विधेयक पारित नहीं कर देती, तब तक समेकित निधि से कोई भी निकासी नहीं हो सकती। स्वाधीन भारत का प्रथम रेल बजट 20 नवम्बर, 1947 को यातायात मंत्री डॉ. जान मथाई द्वारा पेश किया गया था, जो एक जनवरी, 1948 को लागू हुआ था।

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