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दादा जी की थैली
August 30, 2019 • अविना गहलोत

मेरे दादाजी के कंधे पर हमेशा एक । थैली लटकी रहती थी उसमें उनकी जरुरत का छोटा-मोटा सामान उसमें रहता था। बिल्कुल जादुई पिटारी की तरह थी दादा जी की थैली। जब भी दादा जी कहीं जाते हैं मेरे लिए कुछ ना कुछ जरुर लाते हैं। बाहर से आने पर मैं तो इंतजार करता, दादाजी कब अपनी थैली खोलें और मुझे जादुई थैली में से आम, अमरुद खाने को मिले।

 एक दिन गर्मी की दोपहर में दादा जी को सिलाई मशीन चलाते देख टीनू भी पास आकर बैठ गया ।

 'दादा जी आप इन कतरनों से क्या बना रहे हैं?'

टीनू! में इन कतरनों से सामान लाने के लिए थैली सील रहा हूँ।

टीनू : दादा जी आपने सीलना कहाँ से सीखा?

दादा जी : जब में सेना में सिपाही था तो मुझे सिलाई में रुचि थी वहाँ इसकी ट्रेनिंग मिली। सेना में रहकर मैं अपने और साथी सिपाहियों की वर्दी दुरुस्त कर दिया करता था। इस काम में मुझे बहुत मजा आता था।

सेना में हम अपना सामान लाने के लिए थैले का ही प्रयोग करते थे, ये थैले मैं बहुत ही खूबसूरती सील दिया करता था।

बहुत ही खूबसूरती सील दिया करता था। टीनू : दादा जी इतने सारे थैलों का हम क्या? करेगे घर में तो पहले से ही कई थैले हैं।

दादा जी : टीनू ये थैले हम उन लोगों को देंगे जो यह जानते हुए की पोलीथिन सेहत के लिए हानिकारक फिर भी अपने आलस्य की वजह से इसे बढ़ावा देते हैं।

टीनू : दादा जी क्या मैं भी आपके साथ चल सकता लिए हूँ।

देन हम भी दादा जी : टीनू तुम भी चल सकते हो हमारे साथ हमारे 'मिशन थैला बाँटो अभियान में', आखिर तुम इस देश का भविष्य हो। इस देश का भविष्यखिर तुम टान शाम का टीन शाम को रावलदास की दुकान के बाहर दादा जी के दोस्तों के साथ थैले लेकर दुकान के बाहर पहुँच गए। 

सामने से एक आदमी ने स्कूटर रोका और दुकान से सामान खरीदने लगा।

दुकानदार : साहब थैला लाए हैं।

ग्राहक : नहीं लाया आफिस से सीधा आ रहा हूँ, पोलिथीन में दे दो।

दुकानदार : साहब पोलीथिन तो बंद है। दादा जी ने ग्राहक के पास जाकर अपनी बनाई थैली भेंट की और आगे से बाजार आते हुए थैली साथ रखने सलाह भी दी।

ग्राहक : बाबूजी आप इस थैली की कीमत बताएँ कितनी हुई।

दादा जी : ग्राहक से बोले ये काम में पैसा कमाने के लिए नहीं कर रहा इसके जरिए समाज में जागरूकता लाना चाहता हूँ, ताकि हम सब पोलीथिन के हानीकारक प्रभाव से बच सकें, इस तरह सारी थैलियाँ आने वाले ग्राहकों को बाँट दी।

इसी तरह सिलसिला एक महीने तक जारी रहा। 

आज रविवार का दिन था इस दिन दुकान पर अधिक भीड़ रहती हैं। दादा जी और टीनू चल दिए देखने की उनकी कोशिश कुछ रंग लाई या नहीं।

टीनू ने देखा की दादा जी के द्वारा भेंट किए गए थैले लेकर लोग सामान खरीदने आ रहे हैं।

एक ग्राहक की नजर दादा जी पर पड़ी उसने दादा जी के पास आकर अभिवादन किया और धन्यवाद कहा।

टीनू ने देखा सब ग्राहक दादा जी के र सरकार में से चारों ओर एकत्र हो गए, दादा जी को गोद में उठा लिया और कुछ लोगों ने मुझे भी कंधे पर बैठा लिया, वहाँ एक पत्रकार भी वहाँ मौजूद था।

अगले दिन टीनू के पापा ने देखा सुबह-सुबह अखबार में दादा जी के साथ उसकी भी फोटो छपी थी, लिखा था बुजुर्ग के साथ आने वाली पीढ़ी भी 'पोलीथिन मिटाओ देश बचाओ' अभियान में भाग लिया। उनका थैली बांटो मिशन कामयाब रहा, दुकानदार ने घोषणा की व्यापारी एसोसिएशन की तरफ से दादा जी और उनके सहयोगियों का अभिनंदन किया जायेगा।

खबर पढ़ कर विजय को गर्व का अनुभव हुआ।