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डाक-टिकटों का अद्भुत संसार
October 1, 2017 • Vinay Rana

आम भाषा में डाक-टिकटों तथा UIसंबंधित डाक-सामग्री के संबंधित डाक-सामग्री के संग्रहण को ‘फिलेटेली' कहा जाता है। किसी एक अथवा दूसरी वस्तु का संग्रह करना यह तो मानवमात्र की प्रकृति संग्रह करना यह तो मानवमात्र की प्रकृति के अनुरूप एक सहज वृत्ति है। आदिकाल में मनुष्य तरह-तरह के पत्थर, रंग-बिरंगे फूल-पत्तों, कौड़ी-शंख जैसी विविध वस्तुओं का संग्रह करता रहा होगा। आज की दुनिया के लोग ग्रामोफोन रिकार्ड, हवाई यात्रा के बोर्डिंग कार्ड, विभिन्न प्रकार की घड़ी, ताश के पत्ते, देश-विदेश के करेन्सी नोट-जैसी विविध वस्तुएँ एकत्रित करने का शौक रखते हैं। ऐसे संग्राहकों में उनकी बिरादरी सबसे बड़ी है, जो देश विदेश के सिक्कों तथा डाक-टिकटों का संग्रह करते हैं और जिनके संगठन राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुव्यवस्थित रूप से सक्रिय हैं।

उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्ध के अन्तिम चरण में एक अंग्रेजु महिला ने अनजाने में ही डाक टिकट संग्रह के शौक की शुरूआत कर दी थी। अनोखी अभिरुचि रखनेवाली इस महिला ने निकम्मे डाक-टिकटों से अपने ड्रेसिंग रूम के दीवारों को सजाने का सपना देखा था। उसने लन्दन टाइम्स और दूसरे दैनिकों के पाठकों से यह अनुरोध किया था कि वे इस्तेमाल के बाद निकम्मे हो चुके डाक टिकट उसे भेज दें। अखबार तथा सामयिकों में बार-बार प्रकाशित उसके इस प्रकार के अनुरोध का प्रभाव दूसरे लोगों पर भी पड़ा और उन्होंने भी डाक-टिकटों का संग्रह करना शुरू दिया। आगे चलकर दुनियाभर में संग्राहकों ने विषय वैविध्य के अनुरूप वैज्ञानिक प्रकार से डाक-टिकटों का संग्रह करना शुरू कर दिया।

एशिया में पोस्टेज स्टेम्स का प्रचलन प्रारंभ करने का श्रेय भारत को जाता है। 1852 में ब्रिटिश इण्डिया के सिंध प्रांत के कमिश्नर बर्टल के फरमान के मुताबिक ‘सिंध डाक' जारी किया गया। 1854 में राष्ट्रव्यापी स्तर पर डाक-टिकटों के प्रचलन का एक नया दौर शुरू हुआ। सर्वप्रथम पोस्टकार्ड 1879 में जारी किया गया। फिलेटेली के इतिहास में जॉर्ज पंचम के दौरान 1929 में प्रकाशित एयरमेल श्रृंखला के सात टिकटों का जिक्र दुनिया के सबसे पहले एयरमेल स्टेम्स के रूप में दर्ज हो चुका है। ब्रिटिश शासन के दौरान भारत के डाक टिकट बर्मा, कुवैत, बहरीन और ईस्ट अफ्रीका सहित अनेक ब्रिटिश उपनिवेशों में इस्तेमाल होते थे। बहुत कम लोग यह बात जानते होंगे कि 1 अप्रैल, 1948 को कुवैत को ब्रिटिश पोस्टल एडमिनिस्ट्रेशन के तहत रखा गया, तब तक खाड़ी के इस देश में भारत के डाक टिकट का ही इस्तेमाल होता था, क्योंकि 1923 से कुवैत सहित ईरानी खाड़ी के अन्य अनेक देशों का ब्रिटिश पोस्टल एडमिनिस्ट्रेशन के अधीन बॉम्बे पोस्टल सर्कल में रखा गया था। इसी तरह स्ट्रेट सेटलेमेंट के देशों में हांगकांग, मलाया, सिंगापुर और बोर्निया आदि को बंगाल पोस्टल सर्कल के अधीन रखा गया था।  

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