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चुस्ती-फुर्ती का खेल खो-खो
November 1, 2016 • Pramod Kaushik

रीर को स्वस्थ रखनेवाले खेल कबड्डी के साथ-साथ खो-खो भारत का परंपरागत लोकप्रिय खेल है। यह खेल खिलाड़ी की शारीरिक पुष्टता, वंचिका की क्षमता, शक्ति, गति एवं क्षमता का परीक्षण करनेवाला खेल है। यह खेल महाभारत से भी पूर्व का सर्वमान्यता प्राप्त खेल है, यह कहना गलत नहीं होगा। अन्य भारतीय खेलों के समान यह खेल सरल, मनोरंजक तथा कम खर्चीला है। परंतु यह खेल खिलाड़ी से शारीरिक पुष्टता, शक्ति, गति, क्षमता तथा योग्यता की अपेक्षा करता है। वंचिका देना, फुर्तीलापन तथा नियंत्रित तेज गति इस खेल को रोमांचक बना देते हैं। पीछा करके, केवल तेज दौड़कर ही नहीं, छूना खो-खो का प्रमुख आकर्षण एवं गुण है। इस खेल से आज्ञा-पालन, अनुशासन, खेल-भावना तथा खिलाड़ियों में परस्पर सहयोग आदि गुणों का विकास होता है।

खेल की विधि : 

दल में 12 खिलाड़ी होते हैं। परंतु प्रतियोगिता में 9 खिलाड़ी भाग लेते हैं। खेल दो पारियों में खेला जाता है। एक पारी में 7 मिनट तक बारी-बारी से पीछा करने व दौड़ने की क्रिया की जाती है। छूनेवाले दल के आठ सदस्य एक पट्टी पर बने वर्गों पर बैठते हैं। बैठते समय बारी-बारी से एक दुसरे की विपरीत दिशा में बैठते हैं। नवाँ खिलाड़ी प्रमुख धावक होता है। वह दो स्तंभों में से एक के समीप खड़ा होकर दौड़कर छूने के लिए तैयार रहता है। इस दल के सदस्य विरोधियों को अपने हाथ से छूकर उन्हें बारी-बारी बाहर करते हैं। ऐसा करते हुए उन्हें नियम भंग करने (फाऊल) से बचना होता है। 7 मिनट में दूसरे दल के सदस्यों को छूनेवालों से बचना होता है। खिलाड़ी तीन कारणों से बाहर किए जाते हैं। : 1. यदि वह पीछा करनेवाले द्वारा बिना फाऊल छू लिया जाए, 2. यदि वह सीमा से स्वयं ही बाहर हो जाए और 3. यदि सीमा में विलंब से प्रवेश करे।।

धावक दल के खिलाड़ी 3-3 के समूह में बारी-बारी सीमा में प्रवेश करते हैं। तीसरे खिलाड़ी के बाहर होते ही दूसरे समूह के तीनों खिलाड़ियों को सीमा में तुरंत छूनेवाले द्वारा खो देने से पूर्व ही तुरंत प्रवेश करना होता है। तीनों खिलाड़ियों को मध्य पारी के दोनों ओर दौड़ने की छूट है, परंतु छुनेवाला दौड़ते हुए अपनी दिशा नहीं बदल सकता। वह मध्य पारी को भी पार नहीं कर सकता। वह बैठे हुए किसी खिलाड़ी को पीछे से छूकर तथा ऊँची आवाज़ में खो बोलकर अपनी दिशा बदल सकता है। खेल इसी प्रकार 3-3 धावकों के माध्यम से 7 मिनट तक चलता रहता है।

एक पारी के अंत में 5 मिनट का अंतराल दिया जाता है। दोनों दल बारी-बारी से धावक तथा बचाव-पक्ष की भूमिका निभाते हैं।

खो-खो किसी भी आयु के बच्चे, पुरुष तथा महिलाएँ खेल सकते हैं। खेल के लिए 29 x 16 मीटर का एक आयताकार स्वच्छ व सपाट मैदान चुना जाता है। खेल के लिए दो स्तंभों की आवश्यकता होती है। खेल का समय 37 मिनट है।

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