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गौ : माता भी, उपचारक भी
November 1, 2017 • Dr. Bharat Singh 'Bharat'

मनुष्य और गाय का साथ युगों पुराना रहा है। हमें कभी तो यह विचार करना चाहिए कि गाय को माता क्यों कहा जाता रहा है। कोई तो खास बात होगी। हमारे ग्रन्थों में जन्मदात्री माँ के अतिरिक्त चार मातृतुल्य बड़ी बहन, भाभी, मौसी तथा सासू माँ का वर्णन है। इसके अलावा माँ के दो और रूप होते हैं। पृथिवी माँ और गोमाता। इन सातों रूपों में माताएँ उपकारी, वात्सल्यमयी, करुणामयी, हमारी रक्षक एवं पालनहार होती हैं।

पुराने युगों का अवलोकर करें, तो महाराज दिलीप ने एक गाय पाली थी, त्रेता में महर्षि वसिष्ठ जी के पास कामधेनु गाय थी तथा द्वापर में स्वयं भगवान् श्रीकृष्णजी गाय चराते थे। इस तरह कलियुग में आज से मात्र सौ वर्ष पूर्व भारत में गोधन बहुत था, इसीलिए कहा जाता था कि भारत में दूध, दही की नदियाँ बहती थीं। कहते हैं गुरु नानक देव स्वयं गाय चराते थे। गौ ही एकमात्र जीव है, जिसके द्वारा प्रदत्त पञ्चगव्य (गोदुग्ध, दही, घी, गोबर, मूत्र) सब मनुष्य के काम आता है। एक उपयुक्त सम्पूर्ण आहार कहा गया है: क्योंकि इसमें भोजन के सभी पौष्टिक तत्त्व (प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन) पाए जाते हैं।

गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए पूर्ण उपयोगी होता है। यह शीघ्र पाचक है। तथा पूर्णरूपेण पौष्टिक, बलशाली है।।

गोदुग्ध, स्तनधारी जितने भी जीव होते हैं, उनमें सर्वोत्तम होता है। यही एक ऐसा दृध है जिसका सेवन सभी कर सकते हैं।

गाय का दूध मधुर, स्निग्ध एवं रुचिकर होता है। यह वीर्यवर्धक, वात, पित्तनाशक सब प्राणियों के लिए अनुकूल एवं लाभप्रद होता है।

गाय का दूध पुष्टिकारक, बलकारी, बुद्धिप्रदत्त तथा आयुवर्धक होता है।

गोदुग्ध मनुष्य के लिए बाजीकरण । रसायन है। गाय का दूध मानसिक रोग, उन्माद, शोथ, मूच्र्छा के लिए अनुकूल एवं लाभप्रद होता है।

गोदुग्ध पाण्डुरोग, बवासीर, हृदयरोग, रक्त-पित्त, पुरुष-रोग, स्त्री-रोगों के लिए भी लाभकारी है।

यह बालक, युवा तथा बुजुर्गों के लिएफायदेमन्द है। गाय के दूध के इतने फ़ायदे हैं जिनका वर्णन करना असंभव है।

गाय का दही (गोदधि)

गो-दधि अत्यन्त रुचिकर अग्निप्रदीपक, वातनाशक होता है। यह मीठा, ठण्ढा, पौष्टिक होता है। गाय का दही सबको प्रिय लगता है।

रक्ताल्पता- शरीर में यदि खून की कमी है, तो दही फायदेमन्द है। यह सप्तधातुओं को पोषित करता है, मनुष्य को निरोगी बनाता है।

मन्दाग्नि- भूख न लगती हो, उदर में मन्दाग्नि हो, तो दही में जीरा भूनकर पीसकर काला नमक के साथ सेवन करने में लाभकारी होता है।

दस्त में- दस्त लगे हों, तो गाय के दही में ईसबगोल की भूसी डालकर सेवन करने से लाभ होता है।

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