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गावो विश्वस्य मातरः
March 1, 2017 • Dr. Nishant Kumar

'गाय ब्रह्माण्ड की माता है। भारतीय समाज में प्राचीन काल से गाय का एक विशेष स्थान है। कृषि, परिवहन, आहार, चिकित्सा, उद्योग, धार्मिक कार्य, अर्थव्यवस्था इत्यादि के क्षेत्र में गाय की बेहद महत्त्वपूर्ण भूमिका है।

गाय का दूध

किसी भी अन्य प्रजातियों की तुलना में गाय का दूध मानव के दूध समान अनुकूल एवं अतुल्य है। गाय का दूध मानव समाज, विशेषकर बच्चों के पोषण के लिए अत्यंत उपयोगी है। गाय के दूध के कुछ बहुमूल्य उपयोग निम्नलिखित हैं :

यदि दैनिक आहार के साथ गाय के दूध का सेवन किया जाए, तो ये एक संतुलित आहार है। दूध में मौजूद प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, खनिज, मानव शरीर को स्वस्थ एवं मजबूत रखते हैं।

कार्बोहाइड्रेट से शरीर को ऊर्जा मिलती है, प्रोटीन से शारीरिक विकास होता है तथा विटामिन एवं खनिज दृष्टि, प्रतिरोधक क्षमता इत्यादि को बेहतर बनाते हैं।

गाय के दूध में मौजूद प्रोटीन मांसपेशियों का विकास करता हैतथा एंटीबॉडी का निर्माण कर शरीर की प्रतिरोधक-क्षमता बढ़ाता है।

विटामिन डी : गाय का दूध विटामिन डी का बेहद अच्छा स्रोत है। यह कैल्शियम का अवशोषण कराकर हड़ियों को मज़बूत बनाता है।

विटामिन बी 12 : दूध में मौजूद विटामिन बी 12 शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित होता है तथा मस्तिष्क-संबंधी कार्यों को बेहतर बनाता है।

जस्ता : दूध में मौजूद जिंक शारीरिक विकास एवं वृद्धि में सहायक है।

बच्चों के शारीरिक विकास के दौरान गाय का दूध जरूरी पोषक तत्त्व प्रदान करता है। बढ़ते बच्चों के दाँतों के स्वास्थ्य के लिए गाय का दूध बेहद महत्त्वपूर्ण है। गाय का दूध दाँतों के इनैमल परत को अम्लीय पदार्थों से बचाकर उन्हें मजबूती प्रदान करता है। गाय का दूध ढेर सारी बीमारियों, जैसे- उच्च रक्तचाप, दन्तक्षय, निर्जलीकरण, साँस की समस्याएँ, मोटापा, कुछ प्रकार के कैंसर, इत्यादि के बचाव में महत्त्वपूर्ण है। शोधों से ये ज्ञात हुआ है कि देशी गाय के दूध में मौजूद कैल्शियम पेट की कोशिकाओं को कैंसर से बचाता है। गाय का दूध माइग्रेन एवं सरदर्द में लाभकारी है। गाय का दूध औरतों की माहवारी-संबंधी समस्याओं को भी कम करता है।

स्तन-कैंसर से बचाव में गाय के दूध की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। कुछ शोधों से ये ज्ञात हुआ है कि गाय के दूध से गठिया रोग से भी बचाव होता है।

गाय का मूत्र (गोमूत्र)

गोमूत्र किसी भी अन्य प्रजाति के पशु के मूत्र से भिन्न है। गोमूत्र को वर्षों से दवा के रूप में उपयोग में लाना हमारे भारतीय संस्कृति की एक सम्मानित परम्परा है। गोमूत्र-चिकित्सा एवं अनुसंधान केन्द्र, इन्दौर विगत कुछ सालों में कई शोध करके इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि गोमूत्र के इस्तेमाल से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अस्थमा, एक्जिमा, दिल का दौरा, धमनियों में रुकावट, गठिया, माइग्रेन, थाइराइड, अल्सर, कब्ज, कैंसर, एड्स इत्यादि जैसे गंभीर रोगों का इलाज़ भी सम्भव है।

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