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एक कलाकार की कूची से गोमाता
November 1, 2017 • Parmod Kumar Kaushik

उदयपुर के जाने-माने चित्रकार श्री निर्मल यादव ने परम्परागत शैली को आधार बनाते हुए सांस्कृतिक एवं सामाजिक विषयों को अपने चित्रण में महत्ता दी है। बचपन से ही उन्हें उदयपुर शहर का प्राकृतिक वातावरण, ऐतिहासिक इमारतें, हवेलियाँ, दुर्ग, झीलें, प्राचीन मन्दिर व तंग गलियों से बाहर झाँकते खूबसूरत झरोखे आदि सहज ही आकर्षित करने के साथ गर्व का अहसास कराते रहे हैं। इन्हीं गलियों से गुजरती गायों का भी उन्होंने अपनी कृतियों में भरपूर चित्रण किया है; क्योंकि गोचित्रण हो या पशुओं की फोटोग्राफी- यह उनका पसन्दीदा विषय रहा है। प्रारंभिक कला-यात्रा के दौर में मिनीचर कला के प्रसिद्ध चित्रकार श्री बी.जी शर्मा जी की गोमाता विषय की कृतियों का उन्होंने काफ़ी अनुकरण किया, जिसे कलाप्रेमियों द्वारा उसकी हू-ब-हू अनुकरण के गुण के कारण काफ़ी सराहा गया था। सम्प्रति निर्मल यादव अपनी ही फोटोग्राफी का कैनवास कागज पर चित्रण अपने परिप्रेक्ष्य से संयोजित करते हैं जिसमें आज भी गोमाता का चित्रण उनकी कृतियों का आकर्षण रहता है।