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अरुणाचलप्रदेश अरुणोदय की धरती
September 1, 2016 • Dr. S. Mimoda Devi

जहाँ सूरज की पहली किरण भारत की धरती को स्पर्श करती है, वह भूमि अरुणाचलप्रदेश है। पूर्वोत्तर के राज्यों में सर्वाधिक क्षेत्रफलवाला, किन्तु आबादी का बहुत कम अनुपातवाला यह राज्य ऊँचे पहाड़ों और घने जंगलों के बीच बसा हुआ है। दक्षिण में असम और नागालैण्ड, उत्तर में चीन, पूर्व में बर्मा और पश्चिम में भूटान के साथ इसकी सीमाएँ लगती हैं। भारत के किसी एक प्रदेश में अधिक प्रादेशिक भाषाएँ बोली जाती हैं तोवह है अरुणाचलप्रदेश। हाल के कुछ वर्षों से भारत के अनेक प्रदेशों के लोग अरुणाचल जाकर व्यापार और व्यवसाय प्रारंभ कर रहे हैं।

कल्किपुराण एवं महाभारत में जिस प्रभु पर्वत का वर्णन है (जहाँ परशुराम ने अपने पाप धोए), वह अरुणाचलप्रदेश में है। मान्यता है कि महर्षि वेदव्यास ने यहीं तपस्या की। राजा शीष्मक का राज्य भी यहीं है और भगवान् कृष्ण ने यहीं से रुक्मिणी का हरण किया। असम के अहोम और सुतिया राजाओं का इस पर्वत क्षेत्र पर शासन रहा।

अरुणाचलप्रदेश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में रहनेवाले मोनपा और शेर्डकपेन लोगों ने ऐतिहासिक दस्तावेज रखे जिसके अनुसार 500 ई.पू. से 600 ई. के मध्य मोन्यूल के मोनपा-राजाओं ने यहाँ शासन किया। अरुणाचल का भूभाग 1858 तक अहोम- राजाओं के नियंत्रण में था। 1858 में अंग्रेजों ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया। अरुणाचल के लोग 1947 तक अपना स्थानीय स्वायत्त शासन चलाते थे। सियांग पहाड़ी की तलहटी के निकट उत्खनन से 14वीं शताब्दी में निर्मित मालिनी धान मंदिर निकला जिसका निर्माण असम के सुतिया राजाओं ने करवाया। विश्व के सबसे ऊँचे स्थान पर बना 400 वर्ष पुराना तवांग बौद्ध विहार छठे दलाई लामा त्साझ्याङ ग्यात्सो (1683-1706) का जन्मस्थान है। विवादित मैकमोहन रेखा चीन के अधीनस्थ तिब्बत और अरुणाचलप्रदेश के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा है। चीन इसे अस्वीकार करते हुए अरुणाचल पर अपना दावा जताता रहता है। पूर्वांचल के अन्य राज्यों में अलगाववाद और आतंकवाद की लपटें सुलगती रहती हैं। अशांत क्षेत्र घोषित कर सेना को तैनात किया जाता है। लेकिन अरुणाचलप्रदेश और सिक्किम शांतिप्रिय राज्य हैं। नागालैंड से सटे हुए तिरप और चालाङ् जिलों में थोड़ी अशांति है।

आजादी के पश्चात् 1955 में नार्थ-ईस्ट फ्रंटीयर एजेन्सी (नेफा) बनाई गई जो वर्तमान में अरुणाचलप्रदेश है। लगभग एक दशक तक भारत और चीन के बीच विवाद नहीं रहा। लेकिन 1962 में इसी मुख्य मुद्दे पर दोनों देशों के बीच युद्ध छिड़ गया। चीन ने अरुणाचलप्रदेश की अधिकतर भूमि पर कब्जा कर लिया। लेकिन शीघ्र ही वापस मैकमोहन रेखा पर लौट गया और 1963 में युद्धबंदियों को छोड़ दिया। चीन भले ही त्यांग को अपना बताता हो, लेकिन वास्तव में वह भारत की भूमि है। 20 जनवरी, 1972 को नेफा से बदलकर अरुणाचलप्रदेश बना। अरुणाचलप्रदेश 15 वर्षों तक केन्द्रशासित प्रदेश रहा। 20 फरवरी, 1987 को इसे पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ। अरुणाचलप्रदेश में प्रवेश हेतु इनर लाइन पर्मिट की आवश्यकता होती है। जो दिल्ली या गुवाहाटी से प्राप्त की जा  सकती है।

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