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अध्यात्म पुरूष संत कृपाल सिंह जी महाराज
February 1, 2017 • Parmod Kumar Kaushik

सन्त कृपाल सिंह जी महाराज का हृदय वर्ण, जाति, सम्प्रदाय आदि की संकीर्णता तथा भेदभाव से रहित सरलता, सहिष्णुता, उदारता, परदुःखकातरता, परोपकार, मानवसेवा एवं मानव के आत्मकल्याण की भावना से ओत-प्रोत है। सन्तजी का कहना है : इबादत है किसी नाशाद का दिल शाद कर देना। इबादत है किसी बरबाद को आबाद कर देना ॥ इबादत है किसी बेकफन को कफन उढ़ा देना। इबादत है किसी दर्दमंद का दर्द बटा लेना |

भारत की वसुंधरा पर शांति, सुधा रस की वर्षा करने वाले अनेक संत और महामनीषी हुए हैं। ऐसी ही महान विभूतियों में से एक है संत श्री कृपाल सिंह जी महाराज। जिनकी साधना, चर्चा और कथनी करनी की एकता ने जनजन को न सिर्फ प्रभावित किया है बल्कि धर्म, अध्यात्म और अहिंसा के प्रखर प्रवक्ता के रूप में वे लोगों को समार्ग पर लाते हुए भारत की पावन धरा को अपने सत्कायों से अभिसिंचित कर रहे हैं।

सन्त कृपाल सिंह जी महाराज का ग्वालियर में कोटेश्वर मार्ग पर अध्यात्म निकेतन आश्रम है। अध्यात्म निकेतन की स्थापना आपके पिता श्री सन्तप्रवर हुजूर मालिक साहब ने सन् 1965 में की थी। आपके पूर्वज ग्वालियर स्टेट आर्मी में उच्च पदासीन सैन्य अधिकारी रह चुके हैं। आपका जन्म 19 जुलाई सन् 1952 को महू (मप्र.) में हुआ था। प्रबल पूर्व संस्कार और हुजूर मालिक साहब जैसे संत सद्गुरू के अनग्रह से बाल्यकाल से ही आपके अन्दर उच्च आध्यात्मिक भावों का प्रस्फुटन होने लगा था।

सन्त जी का सम्बन्ध दो सर्वोच्च आध्यात्मिक साधनाओं से है। एक है। सुरत-शब्द योग जिसमें नाम स्मरण और ध्यान से अन्तर्नाद या अन्तर में शब्द की जागृति होकर साधक की चेतना शब्द के साथ मिलकर ऊर्ध्वगामी होती है और अन्ततोगत्वा आत्मसाक्षात्कार की उपलब्धि करती है। आपकी दूसरी साधना है। शक्तिपात-महायोग अथवा कुण्डलिनी योग जिसमें सद्गुरूकृपा से साधक की चेतना अन्तर्मुखी रूप में जागृत होकर नाना प्रकार की योग क्रियाओं-आसान, प्राणायामं, मंत्र प्राकट्य आदि को स्वमेव कराती है और शनैः शनैः साधक के चित्ताकाश में संचित पूर्व संस्कारों की सफाई कराती हुई आत्म साक्षात्कार की उपलब्धि कराती है।

आध्यात्मिक साधना एवं आत्मिक शांति की उपलब्धि हेतु समग्र हिमाचल सहित भारत के विभिन्न प्रान्तों से तथा अमेरिका, यूरोप सहित भारत के बाहर के अनेक देशों से भी आध्यात्मपिपासु अध्यात्म निकेतन में सतत् आते रहते हैं और अपने आत्मकल्याण का मार्ग प्रशस्त करते है। यहाँ का कोई प्रचार-प्रसार न होते हुये भी एक ईश्वरीय योजना की तरह यह सब सम्पन्न होता रहता है।

संत जी का कई बार अमेरिका प्रवास भी रहा है जिसमे न्यूयार्क स्टेट में कॉरनैल विश्वविद्यालय में आपका ध्यान एवं आध्यात्मिक जिज्ञासा समाधान का कार्यक्रम रहा। इसी प्रकार सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक विभूति पॉलब्रन्टन द्वारा स्थापित आध्यात्मिक केन्द्र पर तथा अमेरिका के दक्षिणी राज्य फ्लोरिडा की जेल में एवं अन्य अनेक आध्यात्मिक केन्द्रों पर भी आपके ध्यानादि के कार्यक्रम आयोजित हुए हैं।

आश्रम में नित्य नाम-संकीर्तन, ध्यानभजन, सत्संग आदि के कार्यक्रम नियमित रूप से होते है। प्रति रविवार को दोपहर में सत्संग का विशेष आयोजन होता है। गरूपूर्णिमा, दीपावली, शिवरात्रि तथा होली आदि दीक्षापर्व के रूप में मनाये जाते हैं। तथा इन पर्वो पर कई दिन तक चलने वाले आध्यात्मिक कार्यक्रमों का आयोजन होता

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