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अत्यंत आकर्षक व अद्वितीय है श्रीनगर स्थित इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन
June 20, 2019 • सीताराम गुप्ता

जम्मू व कश्मीर राज्य की राजधानी श्रीनगर एक प्रसिद्ध पर्यटन-स्थल हैजहाँ सीजन में पर्यटकों का ताँता लगा रहता है। एक प्रश्न उठता है कि घाटी में तनाव व असुरक्षा के बावजूद पर्यटक बार-बार श्रीनगर क्यों जाना चाहते हैं? इस प्रश्न के उत्तर में श्रीनगर के कई दर्शनीय- स्थलों के नाम गिनवाए जा सकते हैं जैसे डल और नगीन झीलें, शालीमार और निशात बाग, चश्मे-शाही व परीमहल इत्यादि। इसमें दो राय नहीं कि कश्मीर घाटी के प्रकृतिक सौंदर्य को कई गुना बढ़ाने में इन दर्शनीय- स्थलों का महत्त्वपूर्ण योगदान है लेकिन वर्तमान शताब्दी में इस सूची में कई और नाम भी जुड़ गए हैं जिनमें एक नाम है इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन या कंद पुष्प उद्यान का। वर्ष 2008 में दर्शकों के लिए पहली बार खुला इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन या कंद पुष्प उद्यान कई अर्थों में पुराने दर्शनीय-स्थलों से आगे निकल जाता हैक्योंकि यहाँ इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन में ट्यूलिप अथवा कंद पुष्प की जितनी प्रजातियाँ और फूलों की संख्या एक साथ देखने को मिलती है अन्यत्र दुर्लभ हैं। कश्मीर में ही नहीं पूरे भारत में कहीं भी ट्यूलिप की इतनी अधिक प्रजातियाँ नहीं देखी जा सकती हैं। आज भारत में ही नहीं पूरे विश्व में इसका अपना विशेष स्थान है।

श्रीनगर की भौगोलिक स्थिति व मौसम ट्यूपिल के पौधों के प्रतिकूल बिल्कुल नहीं है जिससे इन्हें यहाँ उगाना सरल नहीं तो असंभव भी नहीं है। यह ट्यूलिप उद्यान श्रीनगर स्थित जबरवन की निचली ढलानों पर स्थित है। इसकी ऊँचाई लगभग उतनी ही है जितनी यहाँ स्थित निशात व शालीमार उद्यानों की है। चश्मे-शाही व परीमहल इसके पास ही हैं लेकिन इससे कुछ ऊँचाई । पर हैं। श्रीनगर स्थित इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन में वैसे तो अनेक अन्य प्रकार के फूल व पेड़-पौधे भी हैं लेकिन यह विशेष रूप से ट्यूलिप के फूलों को ही समर्पित है जिसमें ट्यूलित की अत्यंत आकर्षक व रंगबिरंगी किस्में देखने को मिलती हैं।

नवंबर के महीने में पतझड़ व उसके बाद हिमपात के दौरान घाटी के सभी वृक्ष व वनस्पतियाँ प्रायः नग्न हो जाती हैं। जैसे-जैसे पहाड़ों की ढलानों पर बर्फ पिघलने लगती हैवे हरीभरी वनस्पतियों और सुंदर-सुंदर फूलों से भर जाती हैंवसंत ऋतु अर्थात् मार्चअप्रैल के महीनों में ट्यूपिल के फूलों के खिलने का मौसम प्रारंभ होता है अतः इसी दौरान श्रीनगर स्थित ट्यूलिप गार्डन भी दर्शकों का स्वागत करने के लिए तत्पर हो उठता है। अप्रैल के प्रारंभ में यह तैयार हो जाता है और दर्शकों के लिए खोल दिया जाता है। ट्यूलिप उद्यानोत्सव के दौरान पुष्प व प्रकृति प्रेमी दर्शकों का ताँता लग जाता हैदेश-विदेश के पर्यटक इसके आकर्षण में खिंचे घाटी में चले आते हैंसप्ताहांत में स्थानीय दर्शकों के कारण तो डल के किनारों पर जाम की स्थिति बनी रहती है

यद्यपि बनावट की दृष्टि से ट्यूलिप की सभी किस्में एक जैसी ही होती हैं लेकिन आकार की दृष्टि से इनमें विभिन्नता मिलती है। ट्यूलिप की कुछ किस्में आकार में छोटी होती हैं तो कुछ बड़ी। यदि रंगों की बात करें तो यहाँ प्रकृति में उपलब्ध सभी रंगों के ट्यूलिप मिल जाएँगे। यहाँ सफेद, नीले, पीले, नारंगी, किरमिजी, लाल, गुलाबी, बैंगनी आदि सभी रंगों के ट्यूलिप खिलते हैं। इन रंगों में भी पर्याप्त विविधता मिलती है। कुछ ट्यूलिप एकदम सफेद हैं तो कुछ हल्के क्रीम कलर के। कुछ गहरे लाल हैं तो कुछ हल्के या मिश्रित रंग के लालकुछ गहरे बैंगनी हैं तो कुछ हल्के बैंगनी रंग के। इसी तरह से गुलाबी रंग के ट्यूलिप भी कई शेड्स में दर्शकों को आकर्षित करने में सक्षम हैं। कई रंगों के ट्यूलिप के फूलों पर दूसरे रंग की चित्तियाँ भी देखी जा सकती हैं। कई ट्यूलिप के फूल चमकीले गहरे रंगों में हैं तो कुछ सामान्य रंगों के हैं। इसी आधार पर इनके गोल्डन, स्ट्राँग गोल्डन, गोल्डन परेड, हनीमून, लारगो आदि नाम भी दिए गए हैं। यही नहीं एक बार खिलने के बाद कई प्रकार के ट्यूपिल के फूलों के रंग भी परिवर्तित हो जाते हैं। इनमें कुछ ऐसे रंग भी हैं जिनका सही-सही नाम बतलाना संभव नहीं।

ट्यूपिल के एक पौधे पर प्रायः एक फूल ही खिलता है। ट्यूपिल के फूल ही नहीं इसका सारा पौधा ही सुंदर लगता है। हरे-हरे पत्तों के मध्य सीधे वृंतों के शिखर पर खिले रंग-बिरंगे पुष्प अत्यंत आकर्षक लगते हैं। ट्यूपिल लंबी-लंबी सीधी आयताकार, वृत्ताकार अथवा अन्य ज्यामितीय आकार की क्यारियों में लगाए जाते हैं। जिस प्रकार से एक पंक्ति में पौधों के बीच बराबर अंतर रखा जाता है उसी प्रकार से प्रत्येक पंक्ति में भी बराबर अंतर रखा जाता है। एक क्यारी में प्रायः एक ही रंग अथवा प्रजाति के पौधे लगाए जाते हैं। विभिन्न रंगों के फूलों की क्यारियाँ ऐसे लगती हैं मानों पूरे उद्यान में रंग-बिरंगे कालीन बिछा दिए गए हों। वैसे तो एक क्यारी में कई रंग के ट्यूलिप भी लगाए जा सकते हैं लेकिन एक क्यारी में केवल एक रंग के फूल लगाने का उद्देश्य उनके कंदों को मिलने से रोकना ही हो सकता है।

कंदों को मिलने से रोकना ही हो सकता है। फूल खिलने के बाद यह कुछ दिनों या कुछ सप्ताह तक बना रहता है। ट्यूलिप के फूल की अवधि प्रायः पंद्रह-सोलह दिन मानी गई है। यह देखने में जितना सुंदर लगता है उतना ही कोमल भी होता है। एक निश्चित तापक्रम में यह लंबे समय तक बना रहता है लेकिन विषम तापमान या मौसम में बहुत जल्दी खराब हो जाता है। दिन के समय सूर्य की रोशनी में फूल खिले रहते हैं और सूर्यास्त के बाद बंद हो जाते हैं। यदि रात में बारिश हो जाती है तो फूलों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि फूल के बंद होने के कारण पानी उनके अंदर तक नहीं पहुँच पाता लेकिन दिन में अधिक बारिश हो जाने पर फूल खराब हो जाते हैं। ट्यूलिप गार्डन में लगाए गए ट्यूलिप ज्यादातर एक डेढ़ महीने तक ही खिलते हैंऔर उसके बाद समाप्त हो जाते हैं लेकिन इस एक डेढ़ महीने के सीजन के लिए सारे साल काम चलता रहता है। ट्यूलिप को कंद पुष्प भी कहते हैं क्योंकि इन्हें कंद यानी प्याज के आकार के कंदों से ही उगाया जाता है। फूल खिलने बंद हो जाने के बाद इनके कंदों को सुरक्षित रखने का काम प्रारंभ हो जाता है।

जाता है। अगली वसंत ऋतु में ट्यूलिप उद्यान के तैयार होने से कई महीने पहले नए पौधे लगाने का काम प्रारंभ हो जाता है। पौधों को एक निश्चित क्रम में नाप-तौलकर लगाया जाता है। सभी पौधे एक सीध या गोलाई में लगाए जाते हैं। पौधों को लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए कई विशेषज्ञों की निगरानी में सौ से अधिक माली यहाँ पौधों की देखरेख में लगे रहते हैं। उनके अथक परिश्रम के कारण ही पूरा उद्यान क्षेत्र रंगों से सराबोर हो उठता है। इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन का प्रबंधन व देखरेख जम्मू व कश्मीर सरकार के फ़्लोरीकल्चर विभाग द्वारा की जाती है। श्रीनगर की जबरवान पर्वत श्रृंखला की निचली ढलानों पर लगे इस उद्यान का प्रारंभ वर्ष 2008 में हुआ था। यह लगभग तीस हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला हुआ है जिसमें से उन्नीस हेक्टेयर में पचास से अधिक प्रकार के ट्यूलिप व अन्य पुष्प लगे हुए हैं जिनकी कुल संख्या बारह लाख से भी अधिक है। इसमें से सात हेक्टेयर में केवल ट्यूलिप ही लगे हुए हैं।

दुनिया में सबसे ज्यादा ट्यूलिप के फूल नीदरलैंड में उगाए जाते हैं। ट्यूलिप के फूलों के विश्वव्यापी व्यापार में भी नीदरलैंड की बहुत बड़ी भागीदारी रहती है। आज नीदरलैंड दुनियाँ का सबसे बड़ा ट्यूलिप के फूलों का निर्यातक देश है जिससे लोगों की धारणा बन गई है कि ट्यूलिप का मूल स्थान नीदरलैंड है लेकिन वास्तव में ट्यूलिप का मूल स्थान तुर्की है। तुर्की से सोलहवीं शताब्दी में यह फूल ऑस्ट्रिया, हॉलैंड और इंग्लैंड ले जाया गया। उसी दौरान गेसनर ने अपने लेखों में इस फूल का उल्लेख किया और थोड़े समय में ही यह फूल प्रसिद्ध होकर पूरे यूरोप में फैल गया। गेसनर के नाम पर ही इस फूल का नामकरण ट्यूलिपा गेसेनेरियाना (ळ४स्रं मेरील्लील्लं) किया गया। अपने चित्ताकर्षक रंग-रूप के कारण ट्यूलिप आज पूरे विश्व में लोकप्रिय हो चुका है

श्रीनगर के दूसरे सभी दर्शनीय स्थलों पर पेड़-पौधे व फल-फूल लगाने व उनकी देखरेख करने का कार्य जम्मू व कश्मीर सरकार का फ़्लोरीकल्चर विभाग ही करता है। देश के पुष्प-प्रेमियों में ट्यूलिप की चाहत और लोकप्रियता तथा कश्मीर में इसके उगाने की अनुकूल संभावनाओं को देखते हुए जम्मू व कश्मीर के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने वर्ष 2006 में कश्मीर में ट्यूलिप गार्डन लगाने के विचार को जन्म दिया। उनका यह हसीन ख़्वाब वर्ष 2008 में पूरा हुआ। तब से हर साल लाखों दर्शक इसे देखने आते हैं। वर्ष 2018 में इस उद्यान को देखने के लिए एक लाख अट्टासी हजार से अधिक दर्शक यहाँ पर आए। इस उद्यान को विकसित करने का एक उद्देश्य और भी था की श्रीनगर अथवा कश्मीर घाटी में पर्यटन की अवधि का विस्तार करना। पहले मार्च-अप्रैल के महीनों में पर्यटक यहाँ नहीं आते थे। ट्यूलिप गार्डन के कारण अब अप्रैल के महीने में भी बाहरी पर्यटक यहाँ खूब आते हैं।

बाहरी पर्यटक यहाँ खूब आते हैं। आज भारत में ही नहीं पूरे विश्व में इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन का अपना विशेष स्थान हैयह पूरे एशिया का सबसे बड़ा ट्यूलिप गार्डन है। वर्ष 2015 व 2017 में कनाडा की वर्ल्ड ट्यूलिप समिट सोसायटी ने इंदिरा गाँधी मेमोरियल ट्यूलिप गार्डन को क्रमशः विश्व के दूसरे व चौथे सबसे बड़े ट्यूलिप डेस्टिनेशन के रूप में मान्यता प्रदान की। यहाँ जितने फूल लगे हुए हैं उन सबको पहचानना और सबके नाम बताना एक आम आदमी के लिए असंभव है लेकिन यहाँ आकर इन सबको देखना सचमुच अद्वितीय अनुभव होगा इसमें संदेह नहीं। तो अगली बार जब भी बाहर जाने का कार्यक्रम बने कश्मीर को प्राथमिकता दीजिए और वो भी वसंत ऋतु में जब श्रीनगर के इस उद्यान में ट्यूलिप अपने रंग और हँसी बिखेरना प्रारंभ करे।