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अकबर ने जारी किए
December 1, 2016 • Prof. Thakur Prasad Varma

अकबर ने अपने शासनकाल में र राम-सीय प्रकार के सिक्के चलवाए थे। ये सिक्के इस दृष्टि से महत्त्वपूर्ण हैं कि इन पर न केवल नागरी-अक्षरों में राम सीय अंकित है, बल्कि इनके पुरोभाग पर राम और सीता की आकृतियाँ भी उत्कीर्ण हैं। इसके पूर्व किसी भी मुसलमान शासक ने मानवाकृतियाँ तो दूर, पशु-पक्षियों की आकृतियों को भी सिक्कों पर उत्कीर्ण कराने का साहस नहीं किया था। यह राम-सीय मुद्रा इस दृष्टि से और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है कि राम और सीता की आकृतियों को पुरोभाग पर अंकित किया गया है जो सदैव केवल कलमा के लिए सुरक्षित समझा जाता है। यह बात इस तथ्य को उजागर करती है कि अकबर ने राम की आकृति को पुरोभाग पर स्थान देकर उनकी ईश्वरीय महत्ता को स्वीकार किया था।

मुस्लिम सिक्कों पर नागरी लिपि

अकबर से पूर्व गजनी के सुल्तान महमूद ने 1028 ई. में लाहौर से अपने चाँदी के दिरहम प्रचलित करवाए थे जिनके पृष्ठभाग पर कलमा का संस्कृत-अनुवाद देवनागरी-लिपि में उत्कीर्ण था। राम-सीय सिक्के

राम-सीय सिक्के

अकबर द्वारा प्रचलित राम-सीय सिक्कों में केवल तीन सिक्के प्रकाश में आ सके हैं जिनमें दो सोने की अर्ध मोहरें हैं। इनमें से एक प्रिंसेप (1799-1840) के संग्रह में थी जो अब ब्रिटिश म्यूजियम में है तथा दूसरी केबिने डि फ्रांस में संगृहीत है। तीसरा सिक्का चाँदी की अठन्नी है जिसको लखनऊ के श्री जे.के. अग्रवाल ने प्राप्त किया था और सम्प्रति काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संग्रहालय भारत कला भवन में है। नागपुर के श्री प्रशान्त पी. कुलकर्णी ने सूचित किया है कि एक अन्य सिक्का जबलपुर के श्री दिलीपशाह के व्यक्तिगत संग्रह में है। उन्होंने सोने के राम-सीय सिक्कों की जालसाजी के एक प्रयास को उजागर किया है। उनके अनुसार इस प्रकार के पाँच जाली सिक्के बनवाए गए। हैं। (न्यूज लेटर, इण्डियन क्वायन । सोसायटी, 9 जुलाई, 1991)। उपर्युक्त तीन सिक्कों का विवरण इस प्रकार है :

1. ब्रिटिश म्यूजियम, लन्दन का सिक्का

धातु : स्वर्ण, भार : 74-00 ग्रेन, आकार : 0.8''

पुरोभाग : बिन्दुयुक्त वृत्त में दो आकृतियाँ : (1) एक पुरुष तीन कंगूरेवाला मुकुट पहने, धनुष और बाण सहित; पीछे (2) एक नारी जो अपने चेहरे पर घूघट किए है। लेख : अनुपस्थित।।

पृष्ठभाग : बिन्दुयुक्त वृत्त में अरबी लेख ‘50 इलाही फरवरदीन' लतावल्लरी से अलंकृत (बी.एस.सी., मुगल्स, पृ. 34, नं. 172, प्लेट 5, 172)

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