हैप्पी न्यू ईयर
March 1, 2019 • Rekha Bhatiya

स्कूल से लौटकर राहुल माँ की उँगली थामकर घर की बड़ी सीढ़ियाँ चढ़ते माँ का हाथ खींचने लगा, थोड़ा थका होने की वजह से वह सीढ़ियों को चढ़ने में लगनेवाली अपनी ताकत को खर्च नहीं करना चाहता था। अभी टूशन के सारे बच्चे आ जायेंगें घर पर, माँ भी जल्दी-जल्दी उसे पूरी ताकत से सहारा देती ऊपर ले आयी।

धड्राम की आवाज के साथ मिसिज आहूजा को स्वप्न में लगा पोता स्वप्निल स्कूल बस से स्टैंड पर बस का दरवाजा खोलते हुए जोर से सड़क पर गिर पड़ा, उनका दिल जोर से धड़का, कलेजा मुँह को आ गया, चीख के साथ आँख खुली।

“ओह स्वप्न था!'' वे बुदबुदायी परन्तु ड्रॉइंग रूम से सचमुच कुछ अजीब आवाजें आ रही थी जो माहौल को डरावना बना रही थीं जैसे कोई अंदर घुस आया, शायद अविनाश! ‘कौन है? अविनाश!' जोर से मिसिज आहूजा ने पुकारा। ‘हाँ मॉम! मैं हूँ! अविनाश अर्द्धचेत मिताली को कंधे पर ढोते हुए खुद को घसीटते दरवाजे से अंदर आया, मिसिज आहूजा मदद को लपकी। 'मॉम, मैं ठीक हूँ। दरवाजा, लाइट्स बंदकर तुम भी सो जाओ? आज बच्चों की छुट्टी है, प्लीज उठाना मत। सिर घूम रहा है। मितली थोड़ा उठो भी, चलो यार, ऊपर जाना है, बहुत भारी हो!' लड़खड़ाता अविनाश अर्द्धचेत मितली को घसीटता झिंझोड़ता है

'बेटा, सुबह छह बजे से बड़े गुरूद्वारे में नये साल के अखण्ड पाठ साहिब की अरदास है, मुझे जाना है। तू छोड़ देगा?' 'मॉम! ओला बुला लेना, मुझे क्यों डीस्टर्ब करती हो? ओके गुड नाइट मॉम, सिर भारी हो रहा है। ओह सॉरी! हैप्पी न्यू ईयर मॉम, अब जाकर सो जाओ?' 'हैप्पी न्यू ईयर बेटा! गुड नाईट

बन्देकी खुशी

पार्टी में खाना लग चूका था। मिस्टर राकेश खाने ने शेफ से लड़खड़ाते पूछा, “भई! बिना प्याज-लहसुन वाला खाना कौन-कौन सा है? मुझे बिना प्याज-लहसुन का खाना है? बता भाई? थेंक्यु !' शेफ कुछ समझे नहीं। ‘जी सरजी! क्या चाहिए आपको?' शेफ ने ध्यान से सुनने का प्रयत्न लि कर पूछा। ‘अरे भई, बिना प्याज-लहसुन का खाना कौन सा है? मुझे बिना प्याज-लहसुन के ही खाना खाना है?' मिस्टर राकेश और जोर से बोले।‘जी सरजी! यह मसाला भिंडी, गोबी आलू, जीरा राईस, तंदूरी रोटी, रायता बिना प्याज-लहसुन का हो सकता है। दें क्या आपको?' नम्रता से शेफ बोला‘अरे बादशाओ! ये बिना प्याज-लहसुन का खाना क्यों खाते हो किस लिए भाई?' पास पीठ घुमा दीवान साहब ने मिस्टर राकेश की पीठ ठोंक पूछा।

‘अरे मालिक! तुम हो? भाई अपने भगवान् को खुश करने के लिए और क्या। आँखों में तारे चमकाते मिस्टर राकेश ने कहा। ‘मेरे धार्मिक भाई! फिर यह दारू किसलिए पीते हो?' हाथ नचाते दीवान साहब पूछ बैठे।

‘मालिक-मालिक', वो तो अपने को खुश करने के लिए। अरे बंदा खुश, भगवान डबल खुश। ठहाका मारते मिस्टर राकेश ने आँख मारकर जवाब दिया।

सही शिक्षा

देर श्याम को कोचिंग क्लॉस से निपटकर थकीहारी माँ ने बेटे को होमवर्क करने बैठायाआज गाय पर दस वाक्यों का निबंध लिखना है। टीचर ने स्कूल में गाय और निबंध के बारे में पढ़ाया था।

बेटे ने माँ को सुनाते हुए लिखना शुरू किया, 'गाय एक फालतू जानवर है।'

‘क्या बोला बेटा, जरा फिर से बोल?' माँ चौंकी

गौर कर बेटा आत्मविश्वास से दुबारा बोला, ‘गाय एक फालतू पशु है'

हँसीं छिपाती माँ ने फिर से पूछा, 'बेटा जरा ध्यान से फिर सोचकर बोल?'

दो क्षण सोचकर बेटा दुगने आत्मविश्वास से बोल पड़ा, ‘गाय एक फालतू पक्षी है।

खिलखिलाती हुक्कीबक्की माँ ने पूछा, ‘टीचर ने ऐसा बताया क्या? क्या बताया उसन?

अनभिज्ञ बेटा माँ की ओर प्रश्नवाचक ताकने लगा।

कल गाँधी जयन्ती की छुट्टी थी, आज स्कूल में गाँधी के बारे में पढ़ाया गया, दस वाक्य गाँधीजी के लिए लिखने हैं। ‘माँ, अंग्रेजों के अत्याचार से गाँधीजी भड़क उठे और उन्होंने देश के लोगों से कहा...' माँ फिर भौचक्की।

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